कोलंबो, तीन जून श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार को अधिकारियों को आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडार करने का निर्देश दिया और आगामी महीनों में द्वीप राष्ट्र के समक्ष आसन्न खाद्य वस्तुओं की कमी के दौरान व्यापारियों द्वारा किसी तरह की कृत्रिम कमी पैदा किए जाने को लेकर चेतावनी दी।
वर्ष 1948 में आजादी के बाद से श्रीलंका सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
द्वीप राष्ट्र में विदेशी भंडार की गंभीर कमी के कारण ईंधन, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए लंबी कतारें लगी हैं, जबकि बिजली कटौती और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हैं।
समाचार पोर्टल इकोनॉमी नेक्स्ट ने राष्ट्रपति कार्यालय के मीडिया विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी एक बयान के हवाले से कहा, "राष्ट्रपति राजपक्षे ने संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय करने का निर्देश दिया है कि सामान की कमी न हो और माल की कमी का बहाना करके कीमतें बढ़ाने के कुछ व्यापारियों के संगठित प्रयासों को रोका जाए।"
समाचार पोर्टल के कोलंबो पेज के अनुसार, राष्ट्रपति राजपक्षे ने उपभोक्ता मामलों के प्राधिकरण को मौजूदा स्थिति का फायदा उठाने वाले कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।
राष्ट्रपति का यह अनुरोध तब आया है जब विशेषज्ञों ने इस साल सितंबर से चावल और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की संभावित कमी की चेतावनी दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने सितंबर तक खाद्य वस्तुओं की गंभीर कमी होने की चेतावनी दी है, जिसके लिए श्रीलंका के लगभग शून्य विदेशी मुद्रा भंडार के बीच द्वीप राष्ट्र को उर्वरक आयात करने के वास्ते 60 करोड़ डॉलर की आवश्यकता होगी।
विक्रमसिंघे ने यहां संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें देश की स्थिति के बारे में जानकारी दी।
विक्रमसिंघे ने कहा कि वर्तमान में कृषि क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी समस्या उर्वरक और ईंधन की कमी है।
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