नयी दिल्ली, पांच मई कर अधिकारी फर्जी जीएसटी पंजीकरणों का पता लगाने और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दावे कर अनुचित फायदा उठाने वाले धोखेबाजों की शिनाख्त के लिए दो महीने तक एक खास अभियान चलाएंगे।
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के मंच पर फर्जी पंजीकरण कराने के बाद उसके आधार पर धोखेबाज फर्जी रसीदों के सहारे आईटीसी के दावे करते हैं और किसी भी तरह की सेवा या उत्पाद की आपूर्ति के बगैर ही वह राशि अपने खाते में जमा करा लेते हैं।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा-शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के जीएसटी नीति प्रकोष्ठ ने कहा कि फर्जी पंजीकरण और फर्जी रसीदों जारी कर गलत ढंग से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने की समस्या अब गंभीर हो चुकी है। इसमें बेइमान लोग संदिग्ध और जटिल लेनदेन के जरिये सरकार को राजस्व का भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
सीबीआईसी ने एक सूचना में कहा कि इस बारे में केंद्र एवं राज्यों के सभी कर विभाग 16 मई से 15 जुलाई तक एक विशेष अभियान चलाएंगे। इस दौरान संदिग्ध जीएसटी खातों की पहचान करने के साथ ही फर्जी बिलों को जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) से बाहर करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल देश भर में जीएसटी प्रणाली के तहत 1.39 करोड़ करदाता पंजीकृत हैं। इनमें से फर्जी पंजीकरणों की पहचान के लिए जीएसटीएन पर विस्तृत आंकड़ा विश्लेषपण और जोखिम मानकों का सहारा लिया जाएगा।
फर्जी पंजीकरण की जानकारी मिलने के बाद संदिग्ध जीएसटी पहचान नंबर के सत्यापन के लिए तय अवधि में कदम उठाया जाएगा। अगर सत्यापन के दौरान संबंधित करदाता काल्पनिक पाया जाता है तो उस पंजीकरण को निरस्त करने के लिए फौरन कदम उठाए जाएंगे।
केंद्र एवं राज्यों के जीएसटी अधिकारियों की 24 अप्रैल को संपन्न राष्ट्रीय समन्वय बैठक में दूसरे लोगों के नाम पर फर्जी जीएसटी खाते बनाने की बढ़ती समस्या पर गौर किया गया।
प्रेम
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