नयी दिल्ली, 27 फरवरी मुद्रास्फीति के जनवरी महीने में कम होकर 4.3 प्रतिशत पर आने से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिए नीतिगत दर में कटौती को लेकर गुंजाइश बढ़ी है। प्रतिष्ठित शोध संस्थान नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लायड इकनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) ने अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा में यह कहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने की शुरुआत में नीतिगत दर रेपो 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दी है। मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक अप्रैल में होनी है।
समीक्षा में कहा गया है कि प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भी कुछ प्रमुख आंकड़े... विनिर्माण के लिए खरीद प्रबंधक सूचकांक, जीएसटी संग्रह और वाहन बिक्री अर्थव्यवस्था में बदलाव के संकेत दे रहे हैं।
शोध संस्थान ने कहा कि सकल और शुद्ध रूप से जीएसटी संग्रह में पिछले महीने क्रमशः 12.3 प्रतिशत और 10.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई। जबकि दिसंबर, 2024 में इसमें क्रमश: 7.3 प्रतिशत और 3.3 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई थी।
एनसीएईआर की महानिदेशक पूनम गुप्ता ने कहा, ‘‘मुद्रास्फीति में कमी (सकल मुद्रास्फीति 4.3 प्रतिशत) ने आरबीआई के लिए नीतिगत मोर्चे पर गुंजाइश बना दी है। कृषि क्षेत्र में भी मजबूती दिख रही है, जो मुद्रास्फीति नियंत्रण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अच्छा संकेत है।’’
उन्होंने कहा कि एक अन्य कारक जिस पर नजर रखने की जरूरत है वह है एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की लगातार पूंजी निकासी।
गुप्ता ने कहा, ‘‘ अध्ययनों से पता चलता है कि एफआईआई प्रवाह घरेलू कारकों की तुलना में बाहरी कारकों से अधिक प्रेरित होता है। और इसलिए इसकी प्रकृति काफी अस्थिर है। अतीत की तरह, भारत से एफआईआई की निकासी का मौजूदा चरण वैश्विक घटनाक्रमों का परिणाम है...।’’
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