नयी दिल्ली, 14 अगस्त श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट ने उच्चतम न्यायालय का रुख कर मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण कराने का अनुरोध किया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसका निर्माण वहां पहले से मौजूद एक हिंदू मंदिर के स्थल पर किया गया था।
ट्रस्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी है।
उच्च न्यायालय ने इससे संबंधित एक वाद के खिलाफ दर्ज कराई गई आपत्तियों पर फैसला करने से पहले कृष्ण जन्मूभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की उसकी अर्जी पर निर्णय करने के लिए मथुरा दीवानी न्यायाधीश (सिविल जज) को निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज कर दी थी।
वाद के खिलाफ आपत्तियां मस्जिद की प्रबंध कमेटी और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने जताई थीं।
ट्रस्ट ने शीर्ष अदालत में अपनी याचिका में दलील दी है कि शाही मस्जिद ईदगाह प्रबंध कमेटी हिंदुओं के पूजा स्थल पर कब्जा करने की इरादतन कोशिश कर रही है तथा उसे और अन्य अनुयायियों को परिसर में अपना धार्मिक रस्म करने से रोक रही है।
प्रतिवादी संख्या-1 (शाही मस्जिद ईदगाह प्रबंध कमेटी), अपने प्रतिनिधि सहित, इसी परिसर में नमाज अदा करते रहे हैं, परिसर का उपयोग ‘रेस्ट रूम’ के रूप में कर रहे हैं, जिसे याचिकाकर्ता के लिए पवित्र स्थल/पूजा स्थल माना जाता है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘प्रतिवादी संख्या-1 और उनके प्रतिनिधि निरंतर खुदाई कर रहे हैं हिंदू प्रतीक चिह्नों, मंदिर के स्तंभों, और मंदिर की अन्य महत्वपूर्ण चीजों को नष्ट कर रहे हैं। इससे स्थल की पवित्रता और सांस्कृतिक धरोहर को काफी नुकसान हो रहा।’’
याचिका में कहा गया है कि उसके द्वारा किये गए दावे की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए एक गहन वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने की जरूरत है।
इसमें कहा गया है, ‘‘यह सर्वेक्षण महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराएगा और उनके बयानों की सटीकता की पुष्टि करेगा, जिससे किसी निष्कर्ष या फैसले पर पहुंचने के लिए एक विश्वनीय आधार मुहैया होगा।’’
याचिका में कहा गया है, ‘‘विवादित भूमि से जुड़े धार्मिक परिप्रेक्ष्य में धार्मिक इतिहास और स्थल के महत्व को पूरी तरह से समझने के लिए उपयुक्त वैज्ञानिक सर्वेक्षण के जरिये व्यापक जांच व अध्ययन जरूरी है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘गहराई से इसकी छानबीन करने पर स्थल के ऐतिहासिक महत्व में और धार्मिक विषयों की प्रसांगिकता के संबंध में अंतरदृष्टि मिलेगी।’’
उच्च न्यायालय में, न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की पीठ ने ट्रस्ट की रिट याचिका खाारिज कर दी थी, जिसने अब अपील की है।
इस साल जनवरी में ट्रस्ट ने दीवानी न्यायाधीश, मथुरा के समक्ष एक नक्शे के साथ एक वाद दायर किया था, जिसमें उसके हित और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का अनुरोध किया गया था।
हालांकि, वाद की विचारणीयता पर शाही मस्जिद ईदगाह की प्रबंध कमेटी और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अपना ऐतराज दर्ज कराया था।
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