रूद्रप्रयाग (उत्तराखंड), 16 मई रुद्रप्रयाग जिले में क्रौंच पर्वत पर स्थित कार्तिकेय स्वामी मंदिर में मंगलवार को 108 वालमपुरी शंख पूजा एवं हवन का आयोजन किया गया जिसमें दक्षिण भारत के प्रमुख मठों के लगभग 30 शिवाचार्यों एवं साधुओं ने हिस्सा लिया।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद द्वारा आयोजित पूजा कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज तथा वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचे। यह मंदिर रूद्रप्रयाग—पोखरी मोटर मार्ग पर कनकचौरी से तीन किलोमीटर की पैदल दूरी पर स्थित है।
तमिलनाडु के इष्टदेव मुरगन स्वामी का पर्याय माने-जाने वाले भगवान कार्तिकेय का उत्तर भारत में यह एकमात्र मंदिर है और परिषद द्वारा दक्षिण भारत और उत्तराखंड के बीच संबंधों को प्रगाढ़ बनाने एवं तीर्थाटन का प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया था।
शिवाचार्यों का स्वागत करते हुए महाराज ने कहा कि दो संस्कृतियों को मिलाने वाला यह एक ऐतिहासिक अवसर है और इस आयोजन से पर्यटन और तीर्थाटन को एक नई तीव्रता प्राप्त होगी।
उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु और कर्नाटक में भगवान कार्तिकेय के बहुत अनुयायी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अगस्त्यमुनि के अगस्त्य ऋषि, कार्तिकेय स्वामी मंदिर और अनुसूया मंदिर को मिलाकर एक पर्यटन सर्किट बनाया जाएगा।
आयोजन के लिए मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया तथा आकर्षक विद्युत व्यवस्था से प्रकाशित किया गया था। इस मौके पर ड्रोन से श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा भी की गयी। कार्तिकेय स्वामी मंदिर की तरफ से दक्षिण भारत के छह प्रमुख मुरगन स्वामी मंदिरों हेतु वस्त्र भी भेंट किए गए।
इस अवसर पर कार्तिकेय भगवान पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि और मंडोलिन वादक राजेश ने मंदिर में अपनी प्रस्तुति भी दी।
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