देश की खबरें | एसजीपीसी ने न्यायालय से राजोआना मामले में फैसला करने के लिए केंद्र को निर्देश देने का आग्रह किया

अमृतसर, 16 अप्रैल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने बुधवार को बलवंत सिंह राजोआना और अन्य सिख कैदियों के मामले में केंद्र पर ‘‘विलंब की नीति’’ अपनाने का आरोप लगाया और उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया कि वह राजोआना की मौत की सजा को कम करने पर तत्काल निर्णय लेने का केंद्र को निर्देश दे।

एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति की बैठक हुयी।

बैठक में एसजीपीसी ने केंद्र पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में मौत की सजा का सामना कर रहे राजोआना और अन्य ‘‘बंदी सिंहों’’ (सिख कैदियों) के मामले में ‘‘विलंब की नीति’’ अपनाने का आरोप लगाया।

एक विशेष प्रस्ताव पारित कर मांग की गई कि उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार को राजोआना की मौत की सजा को माफ करने के संबंध में तत्काल निर्णय लेने का निर्देश दे।

बाद में यहां मीडिया से बात करते हुए धामी ने कहा कि राजोआना ने अपना संदेश दिया है कि एसजीपीसी को उनके संबंध में अपनी याचिका वापस ले लेनी चाहिए और केंद्र से शीघ्र निर्णय लेने के लिए कहना चाहिए।

धामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और सिख भावनाओं के अनुरूप राजोआना के मामले में उदारतापूर्वक निर्णय लेने की अपील की।

एसजीपीसी अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि सिख समुदाय सिख कैदियों के लिए न्याय मांग रहा है, भीख नहीं मांग रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि एसजीपीसी इस मामले के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात का समय मांगेगी तथा इसके लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को गृह मंत्रालय भेजेगी।

चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर 31 अगस्त 1995 को हुए विस्फोट में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे। इस मामले में एक विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी।

मार्च 2012 में उसकी ओर से एसजीपीसी द्वारा संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत दया याचिका दायर की गई थी।

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