गर्भवती महिला की मदद के लिये गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं : केन्द्र ने न्यायालय से कहा
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नयी दिल्ली, 12 मई केन्द्र ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से अपने पति और नाबालिग पुत्री के साथ अमेरिका में फंसी गर्भवती महिला की भरसक मदद के लिये गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं ताकि वह कल रवाना होने वाली सैन फ्रांसिस्को-बेंगलुरू की उड़ान पकड़ सके। यह महिला गर्भावस्था के अग्रिम चरण में है।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस दंपति की याचिका पर सुनवाई के दौरान सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने यह जानकारी दी।

इस दंपति ने सैन फ्रांसिस्को से 13 मई को उड़ान भरने वाले विमान में यथासंभव उन्हें स्थान उपलब्ध कराने और भारत लाने का निर्देश देने का न्यायालय से अनुरोध किया है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘ सालिसीटर जनरल ने कहा है कि याचिकाकर्ता (महिला) की सेहत का संज्ञान लेते हुये कल सैन फ्रांसिस्को से बेंगलुरू के लिये उड़ान भरने वाले विमान से या फिर इसके बाद यथाशीघ्र आने वाली उड़ान से याचिकाकर्ताओं को भारत लाने के गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में अब किसी नये आदेश की आवश्यकता नहीं है।’’

पीठ ने इसके साथ ही याचिका का निस्तारण कर दिया।

अधिवक्ता आनंद संजय नूली ने याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिका पर बहस की । याचिका में अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था कि इस गर्भवती महिला के भारत लौटने तक उसके लिये उचित चिकित्सा सुविधा का भी बंदोबस्त किया जाये। याचिका में कहा गया था कि समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलना महिला और उसके गर्भस्थ शिशु के लिये नुकसानदेह हो सकता है।

यह दंपति कारोबार के साथ ही छुट्टियां मनाने के लिये 27 फरवरी को अमेरिका गया था। इस दंपति का छह अप्रैल का वापसी का टिकट था। परंतु कोविड-19 महामारी के मद्देनजर मार्च महीने में लागू लॉकडाउन की वजह से याचिकाकर्ता नेवादा के डेटन मे फंस गये हैं।

अनूप

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