नयी दिल्ली, 29 जुलाई दिल्ली में कोविड-19 के संदिग्ध रोगियों को समर्पित स्वास्थ्य केन्द्रों में लाया तो जा रहा है, लेकिन जांच नतीजे आने तक उनका इलाज अलग वार्ड में चल रहा है।
इससे पहले, खबरें आई थीं कि ये स्वास्थ्य केन्द्र कोविड-19 के संदिग्ध रोगियों को इलाज के लिये कथित रूप से अपने यहां नहीं आने दे रहे। बाद में सरकार ने अस्पतालों को कहा था कि वे ऐसे रोगियों को अपने यहां इलाज के लिये आने दें।
लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल से लेकर पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल तक गंभीर रूप से बीमार संदिग्धों को तत्काल आईसीयू में भर्ती किया जा रहा है।
एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉक्टर सुरेश कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस के संदिग्ध रोगियों को मुख्य कोविड-19 वार्ड से अलग रखा गया है क्योंकि वे संक्रमित हो भी सकते हैं और नहीं भी।
कुमार ने कहा, ''गंभीर लक्षण वाले रोगियों को जैसे ही हमारे अस्पताल लाया जाता है, हम जरूरत के हिसाब से उसे ऑक्सीजन सपोर्ट या वेंटिलेटर सपोर्ट के लिये आईसीयू ले जाते हैं, भले ही इस बात की पुष्टि हुई हो या नहीं कि वह संक्रमित है।''
उन्होंने कहा, ''हम इन संदिग्ध रोगियों की जांच करते हैं और जब तक उनकी जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक उन्हें अलग जगह रखा जाता है। अगर उनके संक्रमित होने की पुष्टि हो जाती है तो उन्हें कोरोना वार्ड ले जाया जाता है। अगर वे संक्रमित नहीं पाए जाते हैं तो हम उनकी तबीयत स्थिर करने का प्रयास कर करते हैं ताकि उन्हें गैर-कोविड केन्द्रों में भेजा जा सके।''
एलएनजेपी अस्पताल में कोविड-19 रोगियों के लिये 2,000 बिस्तर हैं। मंगलवार शाम तक इनमें से 380 बिस्तरों पर मरीज थे। इन 380 में से 88 रोगियों को आईसीयू में और दो मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा था कि एलएनजेपी में 27 जुलाई को किसी रोगी की मौत नहीं हुई। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार बीते दो महीने में पहली बार ऐसा हुआ है।
इसके अलावा पूर्वी दिल्ली के सरकार द्वारा संचालित जीटीबी अस्पताल और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भी इन्हीं नियमों का पालन किया जा रहा है।
जीटीबी अस्पातल के चिकित्सा निदेशक डॉक्टर राजेश रौतेला ने कहा, ''हमारा अस्पताल पुराना है, लिहाजा यहां आईसीयू को अलग-अलग कमरों में बांटा गया है। कुछ में छह तो कुछ में नौ बिस्तर हैं। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि ऐसे संदिग्ध रोगी जो वार्ड या आईसीयू में भर्ती हैं, उन्हें मुख्य वार्ड से अलग रखा जाए ताकि उन्हें कोविड-19 रोगियों के संपर्क में आकर संक्रमित होने का खतरा न हो।''
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