नयी दिल्ली, एक फरवरी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए एक योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने संसद में 2023-24 के लिए आम बजट पेश करते हुए कहा कि अनुसूचित जनजातियों के लिए अगले तीन वर्षों में प्रधानमंत्री विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीएम-पीवीटीजी) विकास मिशन को लागू किया जाएगा। इसके लिए 15,000 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
वित्त मंत्री ने घोषणा की, ‘‘विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए पीएम-पीवीटीजी विकास मिशन शुरू किया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पीवीटीजी परिवारों और बस्तियों को स्थायी आजीविका, सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सड़क और दूरसंचार संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
केंद्र अगले तीन वर्षों में 3.5 लाख आदिवासी छात्रों के वास्ते 749 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के लिए 38,800 शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की भर्ती करेगा।
बजट में जनजातीय मामलों के मंत्रालय के लिए वित्त वर्ष 2023-24 के वास्ते 12,461.88 करोड़ रुपये आवंटित किये गए। इस लिहाज से मंत्रालय के बजटीय आवंटन में 47.44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के लिए 8,451.92 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जिसे बाद में संशोधित कर 7,301 करोड़ रुपये कर दिया गया। वर्ष 2021-22 में जनजातीय मामलों के मंत्रालय का वास्तविक व्यय 6,173.97 करोड़ रुपये हुआ।
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