देश की खबरें | सरफेसी कानून :आदेश निष्पादन के लिए सीएमएम/डीएम कर सकते हैं एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त

नयी दिल्ली, 25 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) या जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण एवं सुरक्षा ब्याज का प्रवर्तन (सरफेसी) अधिनियम, 2002 की धारा 14(एक) के तहत पारित आदेश के निष्पादन में सहयोग के लिए ‘एडवोकेट कमिश्नर’ की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र होंगे।

न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति सी.टी. रविकुमार की पीठ ने कहा कि 2002 के अधिनियम का अंतर्निहित उद्देश्य भारत में वित्तीय संस्थानों को उनके समकक्षों के समान अधिकार देने के लिए सशक्त बनाना है। ऐसे अधिकार अन्य देशों में अंतरराष्ट्रीय बैंकों को प्राप्त हैं जिसके तहत वे प्रतिभूतियों का कब्जा ले सकते हैं और उन्हें बेच सकते हैं।

न्यायालय ने 48 पृष्ठों के अपने फैसलों में कहा, ‘‘हम मानते हैं कि सीएमएम/डीएम 2002 के अधिनियम की धारा 14(1) के तहत पारित आदेश के निष्पादन में उनकी सहायता के लिए एक अधिवक्ता आयुक्त (एडवोकेट कमिश्नर) की नियुक्ति कर सकते हैं।" .

शीर्ष अदालत ने विभिन्न याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें यह सवाल शामिल था कि क्या डीएम या सीएमएम एक वकील नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र है और उसे सुरक्षित संपत्ति और उससे संबंधित दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेने और 2002 के कानून की धारा 14(1ए) के अर्थ के दायरे में सुरक्षित लेनदार को सौंपने के लिए अधिकृत करता है।

पीठ ने कहा कि अधिवक्ता आयुक्त (एडवोकेट कमिश्नर) कोई "नई अवधारणा" नहीं है और वकीलों को नागरिक प्रक्रिया संहिता और आपराधिक प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार विविध प्रशासनिक और आधिकारिक कार्य करने के लिए अदालत आयुक्त (कोर्ट कमिश्नर) के रूप में नियुक्त किया जाता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस अधिनियम की धारा 14 प्रावधान करती है कि यदि कोई सुरक्षित लेनदार सुरक्षित परिसम्पत्तियों पर कब्जा करने का इरादा रखता है, तो उसे लिखित रूप में एक आवेदन के माध्यम से सीएमएम/डीएम से संपर्क करना चाहिए और इस तरह के अनुरोध की प्राप्ति पर, मजिस्ट्रेट को कार्यवाही आगे बढ़ानी चाहिए।

पीठ ने आगे कहा कि यह मानने का कोई कारण नहीं है कि सीएमएम/डीएम द्वारा नियुक्त वकील उसे सौंपे गए कार्य का दुरुपयोग करेगा और इसे कानून के अनुसार सख्ती से नहीं किया जाएगा या यह अधिकार के दुरुपयोग का मामला हो सकता है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)