देश की खबरें | संजय सिंह के डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बनने के बाद साक्षी ने संन्यास की घोषणा की

नयी दिल्ली, 21 दिसंबर आंखों में आंसू लिये रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक ने गुरुवार को यहां बृज भूषण शरण सिंह के विश्वासपात्र संजय सिंह की भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत का विरोध करते हुए अपने कुश्ती के जूते टेबल पर रखे और कुश्ती से संन्यास लेने की घोषणा की।

डब्ल्यूएफआई के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण के करीबी संजय गुरुवार को यहां हुए चुनाव में डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बने और उनके पैनल ने 15 में से 13 पद पर जीत हासिल की। इस नतीजे से तीन शीर्ष पहलवान मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया को काफी निराशा हुई जिन्होंने महासंघ में बदलाव लाने के लिए काफी जोर लगाया था।

इन शीर्ष पहलवानों ने साल के शुरू में बृजभूषण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था जिन पर उन्होंने महिला पहलवानों के यौन शोषण का आरोप लगाया था और यह मामला अदालत में चल रहा है।

टेबल पर अपने जूते रखकर साक्षी ने नाटकीय अंदाज में संन्यास की घोषणा की। साक्षी की आंखों में आंसू थे, उन्होंने कहा, ‘‘हमने दिल से लड़ाई लड़ी लेकिन बृजभूषण जैसा आदमी, उसका बिजनेस साझीदार और करीबी सहयोगी डब्ल्यूएफआई का अध्यक्ष चुना गया है तो मैं कुश्ती छोड़ती हूं। आज के बाद आप मुझे मैट पर नहीं देखोगे। ’’

राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता 31 वर्षीय साक्षी ने कहा, ‘‘हम एक महिला अध्यक्ष चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ’’

साक्षी के 13 साल के करियर का आकर्षण 2016 रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतना रहा, उन्होंने अपने करियर में राष्ट्रमंडल खेलों में तीन पदक जीते जिसमें 2022 चरण का स्वर्ण पदक शामिल है। इसके अलावा उन्होंने एशियाई चैम्पियनशिप में भी चार पदक अपने नाम किये।

वह ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बनी थीं।

हरियाणा की यह पहलवान हालांकि राष्ट्रमंडल खेलों के ताजा चरण से पहले मैट पर जूझ रही थीं और राष्ट्रीय टीम में अपना स्थान युवा सोनम मलिक को गंवा दिया था जिन्होंने राष्ट्रीय चयन ट्रायल के दौरान उन्हें कई दफा हराया।

साक्षी 2022 बर्मिंघम खेलों के दौरान वह फॉर्म में वापसी करती दिख रही थीं लेकिन यह बताना जरूरी है कि राष्ट्रमंडल खेलों में प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी कमजोर होता है क्योंकि जापान और ईरान जैसे ‘पावरहाउस’ के पहलवान इसमें हिस्सा नहीं लेते।

ओलंपिक पदक विजेता पूनिया और फोगाट ने चुनाव के नतीजे आने के बाद मीडिया को संबोधित किया।

बजरंग ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वह प्रतिस्पर्धी कुश्ती जारी रखेंगे या नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार अपनी बात पर कायम नहीं रही कि बृजभूषण का कोई भी विश्वस्त डब्ल्यूएफआई के चुनाव नहीं लड़ेगा। ’’

पहलवानों को अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला लेकिन 28 मई को संसद भवन की नयी इमारत की ओर बढ़ने की योजना के दिन उनका आंदोलन विफल हो गया। तब दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर से प्रदर्शन करने वाले सभी पहलवानों को हटा दिया था।

पहलवानों ने सात जून को आधिकारिक रूप से विरोध बंद किया जब खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने उन्हें आश्वासन दिया कि बृजभूषण के परिवार या करीबी को डब्ल्यूएफआई चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

बजरंग ने कहा, ‘‘संजय सिंह के अध्यक्ष बनने से मुझे नहीं लगता कि महिला पहलवानों को न्याय मिलेगा क्योंकि गंदी राजनीति उन्हें तोड़ने के लिए अब भी जारी है। करीब 15-20 लड़कियां खेल मंत्री से मिली थीं और उन्हें शोषण के बारे में बताया था और आज ये बस छह रह गयी हैं और उन्हें भी पीछे हटने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ’’

उन्होंने कहा कि मंत्रालय अपनी बात से पीछे हट गया कि बृजभूषण के किसी भी विश्वासपात्र को चुनाव में लड़ने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

बजरंग ने कहा, ‘‘जनवरी में हमारे विरोध के बाद मंत्रालय ने एक निगरानी समिति गठित की थी। कई महिला पहलवानों ने पैनल के समक्ष गवाही दी थी जिसके बाद खेल मंत्री ने मीडिया के सामने कहा था कि बृजभूषण से जुड़ा हुआ कोई भी आदमी डब्ल्यूएफआई में नहीं होगा। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने तीन महीने तक निगरानी समिति के फैसले के इंतजार किया और फिर इसके बाद विरोध दोबारा शुरू किया। हम सच्चाई और अपनी बहनों और बेटियों के सम्मान के लिए लड़ रहे थे। ’’

तोक्यो ओलंपिक के इस 29 साल के पहलवान ने कहा, ‘‘हमने जो लड़ाई लड़ी, मुझे लगता है कि अगली एक या दो पीढ़ी को न्याय पाने के लिए यह लड़ाई जारी रखनी होगी। हम पूरी ताकत से लड़े लेकिन सरकार ने जो वादा किया, वह इस पर अडिग नहीं रह सकी। बहुत दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है। ’’

विश्व चैम्पियनशिप और एशियाड पदक विजेता फोगाट ने आरोप लगाया कि महिला पहलवानों को संजय सिंह की अध्यक्षता में और अधिक शोषण का सामना करना होगा।

विनेश ने कहा, ‘‘बजरंग और मैं गृहमंत्री से भी मिले थे और हमने स्पष्ट रूप से महिला पहलवानों के नाम उन्हें बताये थे कि किस पहलवान के साथ क्या हुआ। हमने उनसे इस मामले को देखने का अनुरोध किया था। उन्होंने हमे आश्वस्त किया था। लेकिन तीन-चार महीने तक इंतजार के बाद हमने जंतर मंतर पर फिर विरोध शुरू किया। ’’

विनेश ने कहा, ‘‘यह दुखद है कि संजय सिंह जैसे लोग शीर्ष पद पर काबिज हो रहे हैं। उन्हें अध्यक्ष बनाने का मतलब है कि आने वाली महिला पहलवानों की पीढ़ी को भी शोषण का सामना करना पड़ेगा। जो पर्दे के पीछे हुआ अब खुले में होगा। नहीं पता कि हमें अपने देश में न्याय कैसे मिलेगा। इस देश में कुश्ती का भविष्य अंधकारमय दिखता है। ’’

साक्षी ने टेबल पर अपने कुश्ती के जूते रखने से पहले कहा, ‘‘हम महिला अध्यक्ष की मांग कर रहे थे। अगर महिला अध्यक्ष होती तो शोषण नहीं होता लेकिन आज एक भी महिला नयी संचालन संस्था में नहीं है। ’’

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