विदेश की खबरें | रूस कखोव्का बांध के ध्वस्त होने से प्रभावित इलाकों में राहतकर्मियों को जाने नहीं दे रहा : संरा
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

बांध के ध्वस्त होने के कारण कई इलाकों में लोग फंसे हुए हैं और बिजली की आपूर्ति बाधित है। यह एक पर्यावरणीय आपदा का कारण बन गया है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेशकोव ने सोमवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सहायता एवं राहतकर्मी जो हाल ही में दक्षिणी यूक्रेन में कखोव्का बांध के ढहने से तबाह हुए क्षेत्रों का दौरा करना चाहते हैं, वे वहां नहीं जा सकते क्योंकि युद्ध के कारण यह क्षेत्र असुरक्षित हो गया है।

दिमित्री पेशकोव ने हालांकि स्पष्ट रूप से स्वीकार नहीं किया कि रूस ने संयुक्त राष्ट्र की पहुंच को अवरुद्ध कर दिया था, लेकिन पत्रकारों के साथ एक कॉन्फ्रेंस कॉल में कहा कि यूक्रेनी हमलों ने यात्रा को बहुत जोखिम भरा बना दिया है।

दिमित्री पेशकोव ने कहा, ‘‘ वहां लगातार गोलाबारी हो रही है, लगातार उकसावे की कार्रवाई हो रही है, नागरिक सुविधाएं और आम नागरिक संकट की चपेट में आ गए हैं, लोगों की मौत हुई है, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना वाकई मुश्किल है।’’

यूक्रेन के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता समन्वयक डेनिस ब्राउन ने रविवार देर रात एक बयान में कहा कि संगठन ने इस सिलसिले में मॉस्को और कीव के साथ बातचीत की है। प्रभावित क्षेत्र दक्षिणी खेरसॉन के कुछ हिस्सों पर रूस का जबकि शेष हिस्सों पर यूक्रेन का कब्जा है।

डेनिस ब्राउन ने कहा, ‘‘ रूसी सरकार ने अभी तक अपने अस्थायी सैन्य नियंत्रण वाले क्षेत्रों तक पहुंच देने के हमारे अनुरोध को स्वीकार किया नहीं किया है। हम रूसी अधिकारियों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपने दायित्वों के अनुसार कार्य करने का आग्रह करते हैं। ’’

यूक्रेन के अधिकारियों का आरोप है कि रूस ने जानबूझकर बांध को तबाह किया है क्योंकि यह रूसी सैन्य नियंत्रण वाले इलाके में स्थित था। वहीं, रूस ने बांध टूटने के लिए यूक्रेन के हमले को जिम्मेदार ठहराया है।

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