देश की खबरें | आर जी कर मामला : पीड़िता के माता-पिता ने लोगों से बेटी के लिए न्याय की मांग जारी रखने की अपील की

कोलकाता, पांच फरवरी पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित राजकीय आर जी कर चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में पिछले साल नौ अगस्त को दुष्कर्म और हत्या की शिकार हुई महिला प्रशिक्षु चिकित्सक के माता-पिता ने बुधवार को नौ फरवरी को उसके 32वें जन्म दिन पर न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर उतरने का आग्रह किया।

एक वीडियो बयान में चिकित्सक के माता-पिता ने कहा कि वे तब तक लड़ाई जारी रखेंगे जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिल जाता है।

पीड़िता की मां ने कहा, ‘‘पिछले छह महीनों से हम अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम उस अभागी बेटी के माता-पिता हैं, जिसके सपने चकनाचूर हो गए और उसने कड़ी मेहनत से जो कुछ भी हासिल किया था, वह नष्ट हो गया। नौ फरवरी को वह 32 साल की हो जाती। उस दिन हम अपनी बेटी के लिए न्याय में देरी के विरोध में सड़कों पर उतरेंगे।’’

उन्होंने उन सभी लोगों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने पिछले वर्ष नौ अगस्त को हुई घटना के बाद से उनका समर्थन किया तथा न्याय की उनकी मांग में शामिल हुए।

मां ने कहा, ‘‘जब वह एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी, तब उसका जन्मदिन चिकित्सा महाविद्यालय में मनाया जाता था। उसके स्नातक होने के बाद, उसका जन्मदिन उसके कार्यस्थल, नर्सिंग होम और चैंबर में मनाया जाता था। फिर जब उसे स्नातकोत्तर करने का मौका मिला, तो उसका जन्मदिन आर जी कर चिकित्सका महाविद्यालय और अस्पताल में मनाया गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस साल वह हमारे बीच नहीं है। हम सरकारी और निजी अस्पतालों में काम करने वाले सभी लोगों से अनुरोध करेंगे कि वे हमारी बेटी को न्याय मिलने में हो रही देरी के विरोध में दीये जलाएं। मेरी बेटी को फूल बहुत पसंद थे, इसलिए मैं लोगों से अनुरोध करूंगी कि वे अपने घरों और कार्यस्थलों पर एक फूल का पौधा लगाएं।’’

कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने किया।

कोलकाता की एक अदालत ने 20 जनवरी को मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय रॉय को सरकारी आर जी कर अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या का दोषी करार देते हुए उसकी मृत्यु तक कारावास की सजा सुनाई है।

हालांकि, पीड़िता के माता-पिता इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और उनका दावा है कि जांच आधे-अधूरे मन से की गई और अपराध में शामिल कई अन्य दोषियों को बचाया गया।

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