नयी दिल्ली, छह अक्टूबर तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और सहयोगियों (ओपेक प्लस) द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में बड़ी कटौती की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है। ऐसे में माना ज रहा है कि भारत में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन अभी और टलेगा। देश में पिछले छह माह से वाहन ईंधन कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है।
दुनिया के कुछ शीर्ष तेल उत्पादक देशों ने बुधवार को तेल की कीमतों में सुधार के लिए नवंबर से उत्पादन में 20 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती करने पर सहमति जताई है। कच्चे तेल की कीमतें हाल में यूक्रेन और रूस के युद्ध से पहले के स्तर पर आ गई थीं।
भारत के लिए यह बुरी खबर है। हाल के सप्ताहों में तेल की कीमतों में गिरावट ने भारत को अपने आयात बिल में कटौती करने के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर सर्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को होने वाले नुकसान को सीमित करने में मदद की थी।
उद्योग के सूत्रों ने कहा कि ओपेक प्लस के निर्णय से पहले डीजल पर घाटा लगभग 30 रुपये प्रति लीटर के शिखर से घटकर लगभग पांच रुपये प्रति लीटर रह गया था, जबकि तेल कंपनियों ने पेट्रोल पर थोड़ा लाभ कमाना शुरू कर दिया था।
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से डीजल की बिक्री पर नुकसान और पेट्रोल पर मार्जिन में कमी आएगी।
उल्लेखनीय है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत आयात करता है और अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें सीधे घरेलू मूल्य निर्धारण को निर्धारित करती हैं।
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