देश की खबरें | मीडिया उद्योग में जिम्मेदारी से एआई का इस्तेमाल बहुमूल्य संपत्ति हो सकता है: पीसीआई प्रमुख देसाई

नयी दिल्ली, 16 नवंबर भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई ने बृहस्पतिवार को कहा कि मीडिया उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल यदि जिम्मेदारी से किया जाये तो यह एक बहुमूल्य संपत्ति हो सकता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल के ‘‘संभावित प्रतिकूल पहलू’’ को चिह्नित करते हुए, उन्होंने कहा कि ये प्रणालियां विभिन्न डेटासेट से ज्ञान प्राप्त करती हैं और यदि इन डेटासेट में पूर्वाग्रह या रूढ़िवादिता है, तो एआई उन्हें उत्पन्न सामग्री में दोहरा सकता है।’’

देसाई ने कहा, ‘‘इसका तात्पर्य यह है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ‘संभावित’ रूप से नुकसानदायक व्यवस्था को कायम रख सकती है या गलत जानकारी प्रसारित कर सकती है जो प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकती है।’’

देसाई राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर पीसीआई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी।

उन्होंने कहा कि जनसंचार में उन्नत तकनीक के आने के कारण हाल के वर्षों में मीडिया परिदृश्य में काफी बदलाव आया है। उन्होंने कहा, ‘‘अब हम सर्च इंजनों और विभिन्न मंचों के माध्यम से जानकारी तक त्वरित पहुंच के लिए अपने मोबाइल उपकरणों पर निर्भर हैं।’’

देसाई ने कहा, ‘‘यह हमारी राय को प्रभावित कर सकता है, जो एक लोकतांत्रिक समाज में महत्वपूर्ण हैं।’’

उन्होंने कहा कि इसलिए प्रत्येक पत्रकार के लिए सूचना के स्रोतों को सत्यापित करना और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि ये विश्वसनीय हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इससे गलत सूचना फैलने से बचा जा सकेगा।’’

देसाई ने कहा कि आज के डिजिटल युग में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित उपकरण प्रिंट मीडिया के भीतर अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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