भारत और दुनिया की अहम खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.- स्पेन: ट्रेन हादसे में एक की मौत, दर्जनों घायल
- भारत ने बांग्लादेश से राजनयिकों के परिवार वापस बुलाए
- दक्षिण कोरिया: पूर्व प्रधानमंत्री को 'विद्रोह' के लिए 23 साल की सजा
- जयशंकर ने कहा, भारत और स्पेन दोनों ही आतंकवाद से पीड़ित
- जापान में आज दोबारा शुरू होगा दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र
- ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होगा इस्राएल
- कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने 'वैश्विक व्यवस्था' के टूटने की दी चेतावनी
- संयुक्त राष्ट्र के बिना कोई भी देश बेहतर स्थिति में नहीं होगा: बेयरबॉक
ट्रंप ने दावोस में कहा, "यूरोप सही दिशा में नहीं जा रहा"
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपने भाषण की शुरुआत अपनी सरकार की उपलब्धियों के बखान से की. उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल को अमेरिकी इतिहास का "सबसे नाटकीय बदलाव" बताया. डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उनकी आर्थिक नीतियों से अमेरिका तेजी से तरक्की कर रहा है और कहा, "जब अमेरिका में बूम आता है, तो पूरी दुनिया में बूम आता है."
यूरोप की स्थिति पर तीखी टिप्पणी करते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि अनियंत्रित सामूहिक प्रवासन और विदेशी आयात के कारण यूरोप के कुछ हिस्से अब "पहचानने योग्य भी नहीं" रहे. उन्होंने कहा कि वे यूरोप का भला चाहते हैं, लेकिन महाद्वीप सही दिशा में नहीं जा रहा है. इसके साथ ही, उन्होंने अपने "रेसिप्रोकल टैरिफ" का बचाव करते हुए कहा कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कोई नुकसान नहीं हुआ, बल्कि दुनिया भर के देश उनके साथ डील करने के लिए कतार में खड़े हो गए.
भाषण के दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर भी बात की. उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के प्रति सम्मान जताते हुए भी साफ कहा कि इस विशाल और असुरक्षित द्वीप की सुरक्षा केवल अमेरिका ही कर सकता है. उन्होंने तर्क दिया कि ग्रीनलैंड वास्तव में उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है और रणनीतिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अमेरिका को इसकी जरूरत है. ट्रंप ने इसके अधिग्रहण के लिए तत्काल बातचीत शुरू करने की मांग की है, जिससे भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ने की आशंका है.
ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल हुआ पाकिस्तान
पाकिस्तान ने बुधवार, 21 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है. इस्लामाबाद स्थित विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, "पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के ढांचे के तहत गाजा शांति योजना को लागू करने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए यह निर्णय लिया है." प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को रविवार को इस बोर्ड में शामिल होने का आधिकारिक निमंत्रण मिला था.
यह 'बोर्ड ऑफ पीस' डॉनल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना के दूसरे चरण का हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य गाजा में युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना और हमास का निरस्त्रीकरण करना है. हालांकि, हमास ने हथियार डालने की शर्त को खारिज कर दिया है. दूसरी ओर, यूरोपीय नेताओं ने चिंता जताई है कि ट्रंप का यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के समानांतर खड़ा होकर एक प्रतिद्वंदी संस्था बन सकता है, जिसका उपयोग अन्य भू-राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.
पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि इस नए ढांचे के जरिए गाजा में स्थायी युद्धविराम लागू करने, मानवीय सहायता बढ़ाने और युद्धग्रस्त क्षेत्र के पुनर्निर्माण में मदद मिलेगी. बयान में यह भी कहा गया है कि इन प्रयासों से फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को सुरक्षित करने का रास्ता साफ होगा.
इस्राएली हमले में तीन पत्रकारों की मौत: गाजा सिविल डिफेंस
गाजा की सिविल डिफेंस एजेंसी ने जानकारी दी है कि बुधवार, 21 जनवरी को गाजा पट्टी के मध्य में हुए एक इस्राएली हवाई हमले में तीन पत्रकारों की मौत हो गई. मरने वालों की पहचान मोहम्मद सलाह कश्ता, अनस गनीम और अब्दुल रऊफ शात के रूप में हुई है. अब्दुल रऊफ शात समाचार एजेंसी एएफपी के लिए फ्रीलांस वीडियोग्राफर और फोटोग्राफर के तौर पर काम करते थे, हालांकि हमले के वक्त वे एजेंसी के किसी असाइनमेंट पर नहीं थे.
ईरान में जमशेद शारमाद को दे दी गई मौत की सजा
सिविल डिफेंस ने बताया कि गाजा सिटी के दक्षिण-पश्चिम में अल-जहरा इलाके में एक नागरिक वाहन को इस्राएली ड्रोन ने निशाना बनाया. दूसरी ओर, इस्राएली सेना ने कहा है कि वह इन रिपोर्ट्स की जांच कर रही है. हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक इस्राएली कार्रवाई में कम से कम 466 फलस्तीनी मारे जा चुके हैं, जबकि इसी अवधि में तीन इस्राएली सैनिकों की भी जान गई है.
बांग्लादेश में अब मीडिया भी कट्टरपंथी ताकतों के निशाने पर
मीडिया निगरानी संस्था 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 220 पत्रकार मारे जा चुके हैं. संस्था ने कहा है कि इस्राएल लगातार तीसरे साल दुनिया भर में पत्रकारों के लिए सबसे घातक देश बना हुआ है.
टीनेजर्स के लिए सोशल मीडिया बैन करने पर विचार करेगा ब्रिटेन
ब्रिटेन की सरकार ने कहा है कि वो टीनेजर्स के लिए सोशल मीडिया बैन करने पर विचार करेगी. सरकार ने कहा है कि वो तकनीक के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर पेरैंट्स, युवाओं और अन्य हितधारकों से सलाह-मशविरा करेगी. यह घोषणा ऐसे समय पर हुई है, जब ब्रिटेन बच्चों को हानिकारक कंटेंट और अत्यधिक स्क्रीन टाइम से सुरक्षित रखने के लिए अपने नियमों को सख्त कर रहा है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ किया है. उन्होंने एक नोट में लिखा, "जैसा कि मैंने स्पष्ट किया है कि कोई भी विकल्प खारिज नहीं किया गया है. इसमें यह देखना भी शामिल है कि किस उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की अनुमति देनी चाहिए और क्या हमें लत लगवाने वाले फीचर्स जैसे कभी ना रुकने वाली स्क्रॉलिंग या ऐप्स में बनाई जाने वाली स्ट्रीक आदि पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है."
पिछले महीने ऑस्ट्रेलिया में भी 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन कर दिया गया है. इस कदम के प्रभाव को समझने के लिए ब्रिटिश सरकार के मंत्री ऑस्ट्रेलिया भी जाएंगे. हाल ही में स्टार्मर की लेबर पार्टी के 60 से ज्यादा सांसदों ने पत्र लिखकर मांग की थी कि ब्रिटेन में भी ऑस्ट्रेलिया जैसा बैन लागू किया जाए.
टी-20 वर्ल्ड कप: भारत से बाहर नहीं होंगे बांग्लादेश के मैच
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद(आईसीसी) ने बुधवार, 21 जनवरी को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अगले महीने होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के अपने मैच भारत से बाहर किसी और देश में शिफ्ट करने की अपील की थी. आईसीसी के इस सख्त फैसले के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या बांग्लादेश इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेगा या नहीं.
भारत के खेल जगत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने को तैयार महिलाएं
आईसीसी ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि उन्हें सुरक्षा को लेकर ऐसा कोई भी कारण नहीं मिला जिससे मैच शिफ्ट किए जाएं. परिषद ने कहा, "बांग्लादेशी टीम की सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी स्वतंत्र सुरक्षा निष्कर्ष के अभाव में, आईसीसी मैचों को किसी और जगह स्थानांतरित करने में असमर्थ है."
खेलने के लिए कितनी आजाद हैं भारत की लड़कियां
दूसरी ओर, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड लगातार इस बात पर अड़ा हुआ है कि वे भारत में अपने मैच नहीं खेलेंगे. 20 जनवरी को ढाका सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि वे अपना फैसला बदलने के लिए किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएंगे.
मौजूदा वित्त वर्ष में 18 अरब डॉलर पर पहुंचेगा भारत का उर्वरक आयात
मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का उर्वरक आयात 18 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है. यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 76 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों और उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून के दौरान हुई भारी बारिश के चलते किसान अधिक क्षेत्र में फसल उगाने के लिए प्रेरित हुए, जिससे उर्वरक की जरूरत बढ़ गई.
एक सरकारी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इस साल यूरिया और डीएपी के आयात में काफी बढ़ोतरी हुई, जिससे उर्वरक आयात इतना बढ़ गया. अधिकारी के मुताबिक, अप्रैल से दिसंबर 2025 तक, भारत ने करीब 14 अरब डॉलर का उर्वरक आयात किया. वहीं, जनवरी से लेकर मार्च 2026 तक, भारत के चार अरब डॉलर के उर्वरक आयात करने का अनुमान है. इससे मौजूदा वित्त वर्ष में कुल आयात 18 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा.
भारत मुख्य तौर पर ओमान, रूस, चीन, सऊदी अरब और मोरक्को से यूरिया और डीएपी आयात करता है. भारत ने पिछले वित्त वर्ष में उर्वरक आयात पर 10.23 अरब डॉलर खर्च किए थे. इंडियन पोटाश के प्रबंध निदेशक पीएस गहलोत के मुताबिक, इस साल उर्वरक के इस्तेमाल में बीती साल के मुकाबले पांच फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.
यूरोपीय संघ ने कहा, 'टैरिफ और ग्रीनलैंड' पर अब पीछे नहीं हटेगा यूरोप
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन ने बुधवार, 21 जनवरी को यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि दुनिया अब एक नई व्यवस्था में प्रवेश कर चुकी है, जहां कूटनीति से ज्यादा ताकत मायने रखती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोप को अपनी अर्थव्यवस्था और रक्षा को मजबूत करने के लिए अपनी पुरानी हिचक छोड़नी होगी.
सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हम अब एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो 'रॉ पावर' से परिभाषित होती है- चाहे वह आर्थिक हो या सैन्य, तकनीकी हो या भू-राजनीतिक और भले ही हम में से कई लोगों को यह पसंद न हो, हमें दुनिया से वैसे ही निपटना होगा जैसी वह अब है."
ग्रीनलैंड विवाद और यूरोपीय सहयोगियों पर टैरिफ लगाने की धमकियों पर भी उन्होंने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि सहयोगियों के बीच का यह झगड़ा केवल रूस और चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों को ही फायदा पहुंचाएगा. फॉन डेय लाएन ने स्थिति की गंभीरता को बताते हुए कहा, "अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में आया यह बदलाव न केवल भूकंपीय है, बल्कि यह स्थायी है. हमें अब यूरोप की पारंपरिक सावधानी से हटकर काम करना होगा."
गुरुवार, 22 जनवरी को ब्रसेल्स में होने वाली यूरोपीय नेताओं की आपात बैठक से पहले उन्होंने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया कि यूरोप अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि अगर सहयोगी देश आपस में ही लड़ेंगे, तो यह उन दुश्मनों को ही मजबूत करेगा जिन्हें हम दूर रखना चाहते हैं. कार्रवाई की चेतावनी देते हुए फॉन डेय लाएन ने कहा, "यूरोप संवाद और समाधान पसंद करता है, लेकिन यदि आवश्यक हुआ, तो हम एकता, तत्परता और दृढ़ संकल्प के साथ कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं."
जर्मनी में फ्री में क्यों बांटे जा रहे हैं 40 लाख किलो आलू?
जर्मनी के सैक्सनी राज्य में एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है, जहां एक किसान के पास 40 लाख किलो आलू का विशाल भंडार बच गया है. दरअसल, पिछले साल आलू की बंपर पैदावार के कारण बाजार में कीमतें इतनी गिर गईं कि जिस व्यापारी ने इन्हें ऑर्डर किया था, उनके लिए इन्हें बेचना घाटे का सौदा बन गया. व्यापारी ने भुगतान तो कर दिया, लेकिन आलू उठाने से मना कर दिया, जिससे ये आलू गोदाम में ही सड़ने की कगार पर पहुंच गए.
कितनी खतरनाक हैं ईरान की खुफिया एजेंसियां जर्मनी में
इतने बड़े पैमाने पर खाने की बर्बादी को रोकने के लिए सर्च इंजन 'एकोसिया' और 'बर्लिनर मॉर्गेनपोस्ट' अखबार ने एक शानदार पहल शुरू की है. उन्होंने फैसला किया कि इन आलुओं को फेंकने के बजाय लोगों में मुफ्त बांट दिया जाए. अब बर्लिन और आसपास के इलाकों में सैकड़ों सामाजिक संगठन और समूह आलू ले जाने के लिए कतार में हैं, ताकि इन्हें जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सके.
जोंडरफेरमोएगेन: क्या है जर्मनी में चुने गए 2025 के सबसे खराब शब्द का मतलब
जर्मनी यूरोपीय संघ में आलू का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और वहां की संस्कृति में इसका विशेष स्थान है. यह पहल न केवल लाखों किलो आलू बर्बाद होने से बचा रही है, बल्कि महंगाई के इस दौर में स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ी राहत भी साबित हो रही है.
रूसी तेल का आयात घटा रहीं भारतीय तेल कंपनियां, मध्य-पूर्व से बढ़ा रहीं
भारतीय तेल कंपनियां अब अपनी तेल आयात की रणनीति बदल रही हैं. वे रूस से अपना तेल आयात घटा रही हैं और मध्य-पूर्व से आयात को बढ़ावा दे रही हैं. ऑयल रिफाइनिंग उद्योग से जुड़े तीन सूत्रों ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि भारतीय तेल कंपनियों ने रूसी तेल की खरीद घटा दी है ताकि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए हो रही बातचीत में तेजी लाई जा सके.
साल 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद भारत रूसी क्रूड ऑयल का एक बड़ा ग्राहक बन गया था. भारत के लिए यह फायदेमंद था क्योंकि प्रतिबंधों के चलते रूस अपना तेल तुलनात्मक रूप से सस्ते दामों पर बेच रहा था. हालांकि, पश्चिमी देशों ने भारत के इस कदम की आलोचना की थी. उनका कहना था कि तेल की बिक्री से मिले धन का इस्तेमाल रूस युद्ध को जारी रखने में करता है.
भारत एक समय तक इन आलोचनाओं को नजरअंदाज करता रहा लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाया. उन्होंने रूसी तेल खरीदने के चलते भारतीय सामान के आयात पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया. इसके चलते दिसंबर 2025 में रूसी तेल का आयात दो साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया. वहीं, ‘ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज’ से होने वाला तेल आयात पिछले 11 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गया.
जोमैटो संस्थापक दीपेंद्र गोयल ने किया सीईओ पद छोड़ने का एलान
दीपेंद्र गोयल 1 फरवरी को जोमैटो की पेरैंट कंपनी 'इटरनल' के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर का पद छोड़ देंगे. कंपनी के क्विक कॉमर्स ब्रांड ब्लिंकइट के प्रमुख अलबिंदर ढींडसा उनकी जगह लेंगे. हालांकि, दीपेंद्र कंपनी के वाइस चेयरमैन बने रहेंगे. उन्होंने शेयरधारकों को भेजे पत्र में लिखा कि लंबे समय के लिए रणनीति बनाने और नेतृत्व का विकास करने जैसे मामलों में उनकी भागीदारी जारी रहेगी.
दीपेंद्र गोयल ने 2008 में जोमैटो की शुरुआत की थी और 2021 में कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट करवाया था. इसके बाद कंपनी का आधिकारिक नाम बदलकर 'इटरनल' कर दिया गया. साल 2022 में उन्होंने ब्लिंकइट को खरीदा जो उनके लिए काफी फायदे का सौदा रहा क्योंकि देश में क्विक कॉमर्स की मांग बढ़ने के चलते कंपनी का सबसे ज्यादा राजस्व वहीं से आने लगा.
इटरनल को मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर 2025) में एक अरब रुपये से अधिक का लाभ हुआ है. यह पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही की तुलना में 73 फीसदी की बढ़ोतरी है.
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, लिव-इन में रह रही महिला को मिलना चाहिए "पत्नी" का दर्जा
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने कहा है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही महिला को "पत्नी" का दर्जा दिया जाना चाहिए ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. जस्टिस एस श्रीमथी ने कहा कि आधुनिक रिश्तों में कमजोर महिलाओं की सुरक्षा करना अदालत का कर्तव्य है क्योंकि लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं को वो कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती, जो विवाहित महिलाओं को मिलती है.
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, अदालत ने एक शख्स की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज करने के दौरान यह बात कही. इस शख्स पर आरोप था कि वह शादी का वादा करके एक महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहा और उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए लेकिन बाद में अपने वादे से मुकर गया. इसके बाद महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था.
कोर्ट ने कहा कि एक परेशान करने वाला चलन दिख रहा है जिसमें पुरुष पहले तो अपनी मर्जी से लिव-इन रिलेशनशिप में जाते हैं लेकिन जब रिश्ता बिगड़ने लगता है तो महिला के चरित्र पर सवाल उठाने लगते हैं. जस्टिस श्रीमथी ने कहा कि पुरुष रिलेशनशिप में रहने के दौरान खुद को "आधुनिक" समझते हैं लेकिन जब रिश्ता बिगड़ने लगता है तो महिला पर आरोप लगाने या उसे नीचा दिखाने में देर नहीं लगाते.
सुनीता विलियम्स ने 27 साल के सफर के बाद 'अंतरिक्ष की दुनिया' को कहा अलविदा
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने नासा में अपनी 27 साल की शानदार सेवा के बाद रिटायरमेंट ले ली है. नासा के अनुसार, उनका आधिकारिक अवकाश पिछले साल 27 दिसंबर 2025 को प्रभावी हुआ. सुनीता विलियम्स का आखिरी मिशन, जो केवल 10 दिनों का होना था, तकनीकी कारणों से खिंचकर साढ़े नौ महीने लंबा हो गया था, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर बिताया.
60 वर्षीय सुनीता विलियम्स के नाम अंतरिक्ष में कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज हैं. उन्होंने अपने तीन मिशनों के दौरान अंतरिक्ष में कुल 608 दिन बिताए हैं, जो किसी भी नासा अंतरिक्ष यात्री द्वारा बिताया गया दूसरा सबसे लंबा समय है. इसके अलावा, उन्होंने 9 बार 'स्पेस वॉक' की है, जो किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री के लिए सबसे अधिक है. वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली दुनिया की पहली व्यक्ति भी बनी थीं.
सुनीता विलियम्स ने अपने करियर की शुरुआत 1998 में नासा के साथ की थी और उनकी पहली अंतरिक्ष यात्रा 2006 में 'डिस्कवरी' शटल से शुरू हुई थी. उनके अंतिम मिशन के दौरान बोइंग स्टारलाइनर में आई खराबी के कारण उन्हें लंबे समय तक स्टेशन पर रुकना पड़ा था, जहां उन्होंने और उनके साथी बुच विल्मोर ने अदम्य साहस का परिचय दिया.
जर्मनी में शराब पीने वालों की संख्या में आई भारी गिरावट
जर्मनी में शराब पीने वाले लोगों की संख्या में पिछले एक दशक में भारी गिरावट दर्ज की गई है. पोलिंग संस्थान 'यूगव' द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2015 में जहां 78 फीसदी लोग शराब पीते थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा घटकर 68 फीसदी रह गया है. हालांकि अब भी बहुमत शराब पीने वालों का ही है, लेकिन लोगों के व्यवहार में आ रहा यह बदलाव काफी स्पष्ट और महत्वपूर्ण है.
हर दिन एक ड्रिंक के बराबर अल्कोहल लेते हैं चिंपैंजी
इस गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका नई पीढ़ी की है. डेटा के अनुसार, जेन जी के केवल 61 फीसदी लोग शराब पीते हैं, जबकि 'मिलेनियल्स' में यह आंकड़ा 71 फीसदी है. युवाओं का स्वास्थ्य के प्रति सचेत होना और "ड्राई जनवरी" जैसे अभियानों का बढ़ता प्रभाव इसका मुख्य कारण माना जा रहा है. लोग अब शराब खरीदने की मात्रा भी कम कर रहे हैं.
सऊदी अरब में अब शराब खरीद पा रहे हैं अमीर गैर-मुस्लिम विदेशी
आंकड़े बताते हैं कि शराब की बिक्री में भी लगातार कमी आ रही है. साल 2021 में जहां 6 करोड़ से अधिक लोगों ने शराब खरीदी थी, वहीं 2024 तक यह संख्या गिरकर लगभग 5.1 करोड़ रह गई है. विशेष रूप से साल के शुरुआती महीनों में लोग पूरी तरह संयम बरत रहे हैं. शराब छोड़ने वालों में से 38 फीसदी लोगों ने इसका मुख्य कारण अपनी सेहत और शारीरिक तंदुरुस्ती को बताया है.
जम्मू-कश्मीर पुलिस पर पत्रकार को बार-बार पुलिस स्टेशन बुलाने का आरोप
इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उनके विशेष संवाददाता बशारत मसूद को 15 से 19 जनवरी के दौरान, चार बार श्रीनगर के साइबर पुलिस स्टेशन बुलाया और इसकी कोई स्पष्ट वजह भी नहीं बताई. अखबार के मुताबिक, उन्हें एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया कि वे ऐसा कुछ नहीं करेंगे, जिससे शांति प्रभावित हो.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मसूद को 15, 16, 17 और 19 जनवरी को पुलिस स्टेशन बुलाया गया और इन चार दिनों में वे करीब 15 घंटों तक पुलिस स्टेशन में रहे. अखबार के मुताबिक, 16 जनवरी को पुलिस उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने ले गई और बॉन्ड साइन करने के लिए कहा. हालांकि, मसूद ने कहा कि उन्हें यह नहीं पता है कि उनसे यह बॉन्ड साइन करने के लिए क्यों कहा जा रहा है, इसलिए वे हस्ताक्षर नहीं करेंगे.
एक पुलिस अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मसूद की एक हालिया खबर के बाद पुलिस ने उन्हें बुलाया. इस खबर में मसूद ने बताया था कि पुलिस कश्मीर घाटी की सभी मस्जिदों में एक चार पन्नों का दस्तावेज बांट रही है और मस्जिदों से उनके बजट, फंडिंग सोर्स और प्रबंधन समितियों के बारे में जानकारी मांग रही है.
संयुक्त राष्ट्र के बिना कोई भी देश बेहतर स्थिति में नहीं होगा: बेयरबॉक
दावोस में 'वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम' के इतर संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष अनालेना बेयरबॉक ने डॉनल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' को लेकर चल रही चिंताओं को खारिज कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र का मुख्य उद्देश्य 'विश्व शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा' को बनाए रखना है और इसके समानांतर किसी अन्य संगठन की कल्पना करना कठिन है. बेयरबॉक ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र में हर देश को उसकी शक्ति और आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना समान प्रतिनिधित्व मिलता है, जो इसे अद्वितीय बनाता है.
बांग्लादेश में अज्ञात शवों की पहचान के लिए सामूहिक कब्र की खुदाई
बेयरबॉक ने बोर्ड ऑफ पीस का जिक्र करते हुए कहा कि इस बोर्ड को गाजा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा एक स्पष्ट जनादेश दिया गया है, जिसका पालन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अनिवार्य है. उन्होंने उन दावों को भी चुनौती दी जिनमें कहा जा रहा है कि यह बोर्ड भविष्य में संयुक्त राष्ट्र का स्थान ले सकता है. बेयरबॉक के अनुसार, दुनिया का कोई भी देश संयुक्त राष्ट्र के बिना बेहतर स्थिति में नहीं होगा क्योंकि यह शांति और सुरक्षा के लिए एक "जीवन बीमा पॉलिसी" की तरह है.
पूर्व जर्मन विदेश मंत्री और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र की अध्यक्ष बेयरबॉक ने कहा कि यदि कुछ देश अपनी ताकत के बल पर हितों को साधने की कोशिश कर रहे हैं, तो अन्य देशों को एकजुट होकर अंतरराष्ट्रीय नियमों की रक्षा करनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक नियमों के बिना अर्थव्यवस्था और विकास की सफलता संभव नहीं है.
डॉनल्ड ट्रंप गुरुवार, 22 जनवरी को दावोस में 'बोर्ड ऑफ पीस' के चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले हैं, जिसे संयुक्त राष्ट्र के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है. बेयरबॉक ने विश्वास जताया कि अधिकांश देश अभी भी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं और वे इसे कमजोर नहीं होने देंगे. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें दावोस में होने वाले इस हस्ताक्षर समारोह और उसके बाद संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं.













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