नयी दिल्ली, आठ दिसंबर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अच्छी तरह सोच-समझकर जीडीपी वृद्धि के पूर्वानुमान को बढ़ाया है। साथ ही अक्टूबर और नवंबर में सभी उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने शुक्रवार को यह बात कही।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह बिल्कुल साफ है कि भारत ने पहली छमाही में और फिर दो महीने (अक्टूबर, नवंबर) में जो वृद्धि हासिल की है, उसके अनुसार ऊपर की ओर संशोधन सोच-समझ कर किया गया है।’’
रिजर्व बैंक ने अपनी द्विमासिक नीति समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.5 प्रतिशत था।
चालू वित्त वर्ष में जून और सितंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत और 7.6 प्रतिशत रही। इस तरह पहली छमाही में वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही।
सेठ ने कहा कि मुद्रास्फीति के मोर्चे पर अब भी दबाव बना हुआ है और यह चार प्रतिशत के लक्ष्यित स्तर से दूर है।
उन्होंने कहा कि खाद्य उत्पादों के मोर्च पर आपूर्ति पक्ष के सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।
सेठ ने आगे कहा कि भू-राजनीतिक तनाव फैलाव के जोखिम को नियंत्रित कर लिया गया है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी है।
उन्होंने कहा कि वह मुद्रास्फीति के बारे में आरबीआई के आकलन से मोटे तौर पर सहमत हैं।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY