देश की खबरें | अफ्रीकी चीतों के पारगमन में फंसने की खबरें 'पूरी तरह से निराधार': पर्यावरण मंत्रालय

नयी दिल्ली, 17 अगस्त केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि देश के ''ऐतिहासिक क्षेत्रों'' में चीतों को फिर से स्थापित करने की तारीख अभी तय नहीं की गई है। इसके साथ ही मंत्रालय ने चीतों के पारगमन में फंसने की खबरों को ''पूरी तरह से निराधार'' करार दिया।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जंगली प्रजातियों, विशेष रूप से चीता को फिर से स्थापित करने का कार्य इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के दिशानिर्देशों के अनुसार किया जा रहा है। बयान में कहा गया है कि बीमारियों की जांच, छोड़े जाने वाले जानवरों को पृथकवास में रखे जाने आदि के साथ जंगली जानवरों के एक से दूसरे महाद्वीप में परिवहन आदि प्रक्रियाओं के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाने और इसका निष्पादन करने की आवश्यकता होती है।

बयान के अनुसार ‘‘चीता निर्दिष्ट निवास स्थल (रेंज) में छोड़े जाने या स्थानांतरित किये जाने की तारीख अभी तय नहीं की गई है। पूरी प्रक्रिया की संवेदनशीलता को देखते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय परियोजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी सावधानी बरत रहा है। आगमन पर, चीतों को पृथक वास में रखा जाएगा और जंगल में छोड़े जाने से पहले उनकी निगरानी की जाएगी।’’

बयान में कहा गया है, ‘‘मीडिया के कुछ हिस्सों में रिपोर्ट आयी है कि अफ्रीकी चीता अब भी पारगमन में फंसे हुए हैं। यह रिपोर्ट पूरी तरह से निराधार है।’’

उल्लेखनीय है कि 1952 में देश में विलुप्त घोषित किए गए चीतों को लाने के लिए 20 जुलाई को भारत और नामीबिया ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। नामीबिया में सबसे अधिक चीतें हैं।

दक्षिण अफ्रीका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया चल रही है।

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