जरुरी जानकारी | छोटे करदाताओं को जीएसटी रिटर्न को लेकर दी गयी राहत स्वागतयोग्य: उद्योग जगत

नयी दिल्ली, 12 जून उद्योग जगत ने छोटे करदाताओं को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न दाखिल करने में दी गयी राहत के निर्णय का शुक्रवार को स्वागत किया। उद्योग जगत ने कहा कि इससे छोटे व्यवसायों को कोरोना वायरस महामारी के असर से उबरने में मदद मिलेगी तथा उनके लिये कारोबार करना आने वाले समय में सुगम होगा।

उद्योग एवं वाणिज्य संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के अध्यक्ष डॉ डी. के. अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी परिषद की 40वीं बैठक में वित्त मंत्रालय द्वारा की गयी घोषणाएं सराहनीय हैं। उन्होंने कहा, ‘‘छोटे व्यवसायों को जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में दी गयी राहत से न सिर्फ उन्हें कोरोना वायरस महामारी के असर से उबरने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाले समय में उनके लिये कारोबार करना भी और सुगम होगा।’’

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होस्टबुक्स लिमिटेड के संस्थापक एवं चेयरमैन कपिल राणा ने कहा, ‘‘वित्त मंत्री ने जीएसटी परिषद की 40वीं बैठक में कोरोना वायरस महामारी के कारण आये व्यवधान और महामारी के बाद अनुपालन पर ध्यान दिया है। ...ये सभी उपाय दो तरीके से मदद करने वाले हैं। सबसे पहले रिटर्न दाखिल करने में तेजी आयेगी, जिससे जीएसटी संग्रह बढ़ेगा। इसके अलावा अनुपालन का उल्लंघन भी कम होगा, जिससे सरकार और करदाता दोनों को लाभ होगा।’’

सीतारमण ने जीएसटी परिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि पांच करोड़ रुपये वार्षिक तक का कारोबार करने वाले छोटे करदाताओं के लिये फरवरी, मार्च और अप्रैल के रिटर्न दाखिल करने में देरी पर लगने वाली ब्याज की दर को आधा कर नौ प्रतिशत कर दिया गया है।परयह लाभ तभी मिलेगा, जब सितंबर 2020 तक रिटर्न दाखिल कर दिये जायेंगे।

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परिषदने मई, जून और जुलाई के लिये रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा को भी सितंबर तक बढ़ा दिया गया है। इसके लिये कोई ब्याज या विलंब शुल्क नहीं लगेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि जुलाई 2017 से जनवरी 2020 के दौरान शून्य कर देनदारी वाले पंजीकृत इकाइयों को जीएसटी रिटर्न देर से दाखिल करने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। अन्य इकाइयों के लिये जुलाई 2017 से जनवरी 2020 तक की अवधि के लिये मासिक बिक्री रिटर्न दाखिल करने में देरी पर लगेन वाले शुल्क को घटाकर अधिकतम 500 रुपये कर दिया गया है।

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