जरुरी जानकारी | समझौता समाधान पर निर्देशों से सुसंगत हुए हैं नियामकीय नियम : आरबीआई

मुंबई, 20 जून भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि जानबूझकर चूक करने वाले कर्जदारों के साथ समझौता समाधान और तकनीकी रूप से बट्टे खाते में डालने से संबंधित हालिया निर्देशों से बैंकों के लिए मौजूदा नियामकीय व्यवस्था को सुसंगत बनाने और बेहतर पारदर्शिता के लिए कुछ संबंधित प्रावधानों को सख्त करने में मदद मिली है।

रिजर्व बैंक ने गत आठ जून को द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में विनियमन के दायरे में आने वाली सभी इकाइयों के लिए एक व्यापक नियामकीय रूपरेखा जारी की थी। इसके तहत समझौता समाधान और तकनीकी रूप से बट्टे खाते में डाले जाने वाले मामलों की निगरानी की जानी है।

हालांकि बैंकों के श्रमिक संगठन एआईबीओसी और एआईबीईए ने रिजर्व बैंक के इस कदम का विरोध करते हुए कहा है कि कर्ज भुगतान में इरादतन चूक करने वालों के साथ समझौता के जरिये निपटारा करना एक गलत तस्वीर पेश करेगा।

इसके बाद केंद्रीय बैंक ने सोमवार को इससे संबंधित सवाल-जवाब (एफएक्यू) जारी किए। एफएक्यू में रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को धोखाधड़ी वाले खातों और इरादतन चूक के मामलों में समझौता समाधान के लिए नया प्रावधान लाए जाने के सवाल पर नकारात्मक जवाब दिया गया है।

इसमें कहा गया है कि धोखाधड़ी और इरादतन चूक के मामलों में समझौता समाधान कोई नया नियामकीय निर्देश नहीं है और यह पिछले 15 साल से वजूद में है। इसके साथ ही एफएक्यू में कहा गया है कि ऐसे मामलों में आठ जून को जारी परिपत्र दंडात्मक उपायों को किसी भी तरह से कमजोर नहीं कर रहा है।

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