देश की खबरें | नियमितीकरण कानून अवैध निर्माण का लाइसेंस नहीं देता : नारायण राणे की याचिका पर अदालत ने कहा

मुंबई, 25 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री नारायण राणे से कहा कि आवासीय ढांचे के अवैध हिस्सों को नियमित करने की अनुमति देने वाले कानून किसी व्यक्ति को अवैध निर्माण करने का लाइसेंस नहीं देते।

न्यायमूर्ति आरडी धानुका और न्यायमूर्ति कमल खता की पीठ ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) को एक हलफनामा दाखिल करके यह स्पष्ट करने को कहा है कि राणे द्वारा यहां जुहू इलाके में उनके बंगले के कुछ हिस्सों को नियमित करने के लिए दायर दूसरे आवेदन पर नागरिक निकाय किन कानूनी आधारों पर विचार कर सकता है। इसके पहले बीएमसी और उच्च न्यायालय ने पिछले महीने ऐसी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि निर्माण ‘प्रथम दृष्टया’ अवैध था।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने 22 जून को राणे की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उनकी आठ मंजिला इमारत के हिस्से को नियमित करने से बीएमसी के इनकार करने को चुनौती दी गई थी।

राणे ने दावा किया था कि शिवसेना के नियंत्रण वाले निकाय ने राजनीतिक बदले की भावना से उनके नियमितीकरण के आवेदन को खारिज कर दिया।

बीएमसी ने तर्क दिया था कि मंत्री ने मंजूरी योजनाओं का उल्लंघन किया और बंगले के लिए फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) का दुरुपयोग किया।

राणे ने इस महीने की शुरुआत में अधिवक्ता शार्दुल सिंह के माध्यम से दूसरी अर्जी दाखिल की थी। सिंह ने यह भी तर्क दिया कि राणे ‘अपने कद के बावजूद’ वर्तमान मामले में केवल एक व्यक्ति की हैसियत से कह रहे थे कि उनके निवास के कुछ हिस्सों को नियमित किया जाए।

राणे की ओर से सिंह ने तर्क दिया, “मौजूदा मामला एक व्यक्ति के आवास का है। यह सार्वजनिक स्थान को प्रभावित नहीं करता है या जनता को खतरे में नहीं डालता है। मैं एक वाणिज्यिक उद्यम नहीं बना रहा हूं। मैं एक वाणिज्यिक निर्माता नहीं हूं, बल्कि एक निजी व्यक्ति हूं।”

सिंह ने आगे कहा कि नियमितीकरण के दौरान किसी भी नियम का उल्लंघन न हो यह सुनिश्चित करने के लिए राणे पर्यवेक्षण के अधीन रहने को तैयार थे।

हालांकि, इस पर पीठ ने कहा, ‘‘एक निजी आवासीय संरचना के नियमितीकरण का प्रावधान किसी को अवैध रूप से निर्माण करने का लाइसेंस नहीं देता है।’’ बीएमसी ने राणे के नियमितीकरण के पहले आवेदन को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि मंत्री ने स्वीकृत एफएसआई के सापेक्ष 300 फीसदी निर्माण किया है।

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