देश की खबरें | ‘मुफ्त सुविधाओं’ के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई से उच्च न्यायालय का इनकार

नयी दिल्ली, तीन फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों द्वारा पेश की जा रहीं ‘‘मुफ्त की सुविधाओं’’ एवं नकदी योजनाओं के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई से सोमवार को इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि मामला सूचीबद्ध होने पर सामान्य तरीके से सुनवाई की जाएगी।

याचिकाकर्ता एवं उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस. एन. ढींगरा के वकील ने मामले को अपराह्न करीब दो बजे तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

इस पर अदालत ने टिप्पणी की, ‘‘अपराह्न दो बजे क्यों? आप मुफ्त सुविधाओं की घोषणा करने की राजनीतिक दलों की कार्रवाई को चुनौती दे रहे हैं। कल या शायद आज चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है। मुफ्त सुविधाओं का जो भी प्रभाव होना था, वह पहले ही हो चुका है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘इसे स्थायी आदेश के अनुसार सूचीबद्ध किया जाएगा। हम (याचिका के) गुण-दोष को लेकर कुछ नहीं कह रहे।’’

ढींगरा ने राजनीतिक दलों द्वारा ‘‘मुफ्त सुविधाओं’’ की घोषणा पर आपत्ति जताई और कहा कि पूरी चुनाव प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून का उल्लंघन करके संचालित की जा रही है।

दोपहर के भोजन अवकाश के बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश एक वरिष्ठ वकील ने एक बार फिर मामले का जिक्र किया और इसे चार फरवरी को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

हालांकि, पीठ ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। पीठ ने कहा, ‘‘किसी ने सुबह इसका उल्लेख किया था। यह क्या है? हमने उसे स्वीकार नहीं किया।’’

दिल्ली में पांच फरवरी को मतदान होगा और आठ फरवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

ढींगरा ने संगठन समय यान (सशक्त समाज) के अध्यक्ष के रूप में अपनी याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) की ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘महिला समृद्धि योजना’ और ‘कांग्रेस की प्यारी दीदी योजना’ जैसी योजनाएं चुनाव कानूनों का उल्लंघन करती हैं, ये योजनाएं ‘‘चुनावी वादों के रूप में रिश्वत’’ हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों की इन योजनाओं में चुनाव के बाद महिलाओं को सीधे नकद लाभ का वादा किया गया है।

याचिका में कहा गया है, ‘‘निर्वाचन आयोग ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर रिश्वतखोरी या मतदाताओं को अनुचित तरीके से प्रभावित करने जैसे वादों से बचना चाहिए। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य उम्मीदवारों के बीच समान अवसर सुनिश्चित करना, चुनाव की अखंडता को बनाए रखना और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों की रक्षा करना है।’’

याचिका में यह घोषित करने का अनुरोध किया गया है कि नकदी देने की ऐसी योजनाएं असंवैधानिक हैं और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की भावना के खिलाफ हैं। याचिका में इसे ‘‘चुनावी हेरफेर’’ के रूप में वर्गीकृत करने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता ने ऐसी योजनाओं के लिए कथित रूप से मतदाताओं के व्यक्तिगत डाटा को जुटाने के संबंध में चिंता जताई और राजनीतिक दलों से ऐसा नहीं करने की मांग की।

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