मुंबई, छह अक्टूबर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ऋण सूचना कंपनियों को अगले साल एक अप्रैल तक आंतरिक लोकपाल नियुक्त करने के लिए कहा है। शिकायत निवारण तंत्र की दक्षता में सुधार के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
आरबीआई ने बृहस्पतिवार को जारी परिपत्र में कहा कि आंतरिक लोकपाल (आईओ) शिकायतकर्ताओं या जनता के सदस्यों से सीधे प्राप्त शिकायतों को नहीं संभालेगा।
परिपत्र के अनुसार, इसके बजाय आईओ केवल उन शिकायतों से निपटेगा जिनकी पहले ही केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) द्वारा जांच की जा चुकी है लेकिन सीआईसी द्वारा आंशिक या पूर्ण रूप से खारिज कर दी गई हैं।
केंद्रीय बैंक ने इस साल अगस्त में रिजर्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना (आरबी-आईओएस) 2021 को और अधिक व्यापक बनाने के लिए सीआईसी को भी योजना के दायरे में लाने का फैसला किया था।
आरबीआई ने कहा था कि यह कदम सीआईसी के खिलाफ शिकायतों के लिए विनियमित संस्थाओं के ग्राहकों को एक लागत मुक्त वैकल्पिक निवारण तंत्र प्रदान करेगा।
आरबीआई ने बृहस्पतिवार को सीआईसी द्वारा आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति पर एक परिपत्र जारी किया।
परिपत्र में कहा गया, ‘‘प्रत्येक सीआईसी आंतरिक लोकपाल को कम से कम तीन साल की निश्चित अवधि के लिए नियुक्त करेगा। यह अवधि लेकिन पांच साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। सीआईसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि आईओ का पद किसी भी समय खाली न रहे।’’
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