लुकुंग (लद्दाख) , 19 जुलाई रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 जून को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में अदम्य साहस एवं वीरता प्रदर्शित करने वाले बिहार रेजीमेंट के जवानों की शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख के अपने दौरे के दौरान व्यक्तिगत रूप से सराहना की।
पैंगोंग झील के तट पर लुकुंग अग्रिम चौकी पर थलसेना के कर्मियों से बात करते हुए रक्षा मंत्री ने रेजीमेंट के कुछ सैनिकों की पीठ भी थपथपाई। उन्होंने भारत के गौरव एवं आत्मसम्मान की रक्षा करने में उनकी वीरता की सराहना की।
14 वीं कोर के लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने जब रक्षा मंत्री को सैनिकों से मिलवाया, तब सिंह ने रेजीमेंट के कुछ वरिष्ठ सदस्यों में से एक से कहा, ‘‘बहुत खूब। हम सभी की ओर से आप सभी को मेरी बधाई। ’’
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, थलसेना प्रमुख एम एम नरवणे, उत्तरी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी और थलसेना के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस दौरान मौजूद थे।
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उल्लेखनीय है कि 15 जून की रात कई घंटों तक गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें भारतीय थलसेना के एक कर्नल सहित 20 कर्मी शहीद हो गए थे। इस घटना के कारण सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया। भारत ने इसे चीन द्वारा की गई सुनियोजित कार्रवाई बताया।
चीनी सैनिकों ने पत्थर, कील लगे डंडे और सरिया से भारतीय सैनिकों पर नृशंस हमला किया था।
इस झड़प में चीनी सेना को भी नुकसान हुआ था जिसका उसने अब तक ब्योरा नहीं दिया है। अमेरिका की एक खुफिया रिपोर्ट में गलवान घाटी में हुई झड़प में चीन के 35 सैनिकों के हताहत होने की बात कही गई है, जबकि भारतीय पक्ष ने यह संख्या इससे भी अधिक बताई है।
गलवान घाटी में हुई झड़प और पैंगोंग सो में अन्य हिंसक घटना के दौरान चीनी सैनिकों से निपटने में वीरता प्रदर्शित करने के लिए पांच सैनिकों को थलसेना प्रमुख ने प्रशस्ति पत्र दिया था।
रक्षा मंत्री के कार्यालय ने लुकुंग में सैनिकों के साथ सिंह की बातचीत का एक संक्षिप्त वीडियो रविवार को जारी किया।
रक्षा मंत्री ने 14,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित अग्रिम चौकी पर सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि गलवान घाटी में हुई झड़प में शहीद हुए भारतीय सैनिकों ने सीमा की रक्षा करने में न सिर्फ अदम्य साहस का परिचय दिया, बल्कि 130 करोड़ भारतीयों के गौरव की भी रक्षा की।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह कहना चाहता हूं कि देश उन्हें कभी नहीं भूलेगा। आपने पूरे राष्ट्र को प्रेरित किया है। आप हमारी असली शक्ति हैं। ’’
सिंह ने कहा कि भारत अपने भू-भाग की एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ेगा।
पैंगोंग झील इलाके में पांच मई को हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच क्षेत्र में कई स्थानों पर गतिरोध बढ़ने के बाद राजनाथ का लद्दाख का यह प्रथम दौरा था।
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