जयपुर, 19 नवंबर राजस्थान के भरतपुर के जिला प्रशासन ने वन्यजीव अभ्यारण्य के एक हिस्से को अधिसूचना मुक्त कराने की पहल की है ताकि वहां उस विशेष गुलाबी बलुई पत्थर (पिंक सैंडस्टोन) के वैध खनन की अनुमति दी जा सके, जिसकी न केवल भवन निर्माण में बड़ी मांग है बल्कि जो अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के निर्माण में भी काम आ रहा है।
मंदिर निर्माण के लिये वर्षो से भरतपुर के बांसी पहाड़पुर से खनन किए गए हजारों टन गुलाबी बलुई पत्थर को अयोध्या भेजा गया हैं लेकिन इस पत्थर की अभी भी और अधिक आवश्यकता है।
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अयोध्या में इस गुलाबी पत्थर की आपूर्ति की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।
मंदिर के निर्माण के लिये इस बलुई पत्थर के ब्लॉक कारीगरी के साथ पहले से ही तैयार है लेकिन इनके साथ कम ग्रेड के पत्थर का इस्तेमाल करने से समस्याएं पैदा हो सकती है।
धौलपुर में मिलने वाले इसी तरह के पत्थर और बांसी पहाडपुर के पत्थर में काफी फर्क माना जाता है।
राजस्थान सरकार के अधिकारियों ने हालांकि, भरतपुर के बांसी पहाडपुर के बैंड बारेठा वन्य जीव अभ्यारण्य के एक हिस्से को अधिसूचना मुक्त कराने की पहल का राम मंदिर से कोई संबंध होने से इंकार किया है।
विहिप नेता त्रिलोकी नाथ पांडे ने अयोध्या में पीटीआई— को बताया कि ‘‘राजस्थान सरकार ने पत्थर की आपूर्ति में कभी कोई परेशानी पैदा नहीं की। हालांकि भरतपुर जिले के बांसी पहाडपुर में वन और वन्यजीव अधिनियम के तहत कुछ तकनीकी समस्याएं थी। उसे अधिसूचना मुक्त कराने के लिये राजस्थान सरकार ने कदम उठाये है।’’
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