डिब्रूगढ़/चंडीगढ़, 23 अप्रैल कट्टरपंथी उपदेशक अमृतपाल सिंह को पंजाब के मोगा जिले के रोडे से रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया। बठिंडा वायु सेना स्टेशन से अमृतपाल को लेकर एक विशेष विमान असम के डिब्रूगढ़ हवाई अड्डे पहुंचा, जहां से खालिस्तान समर्थक अलगाववादी को केंद्रीय कारागार ले जाया गया।
खालिस्तान समर्थक अमृतपाल (29) और उसके समर्थकों ने हथियारों के साथ पिछले महीने एक थाने पर धावा बोला था जिसे देश के सुरक्षा तंत्र द्वारा एक चुनौती के रूप में देखा गया था। इससे पंजाब में एक बार फिर आतंकवाद का खतरा मंडराने लगा जो राज्य में 1980 के दशक में और 1990 के दशक के शुरुआती वर्षों में देखने को मिला था।
अमृतपाल को सुबह 6.45 बजे रोडे में हिरासत में लिया गया। आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले रोडे गांव से था और अमृतपाल को पिछले साल इस गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन का प्रमुख नियुक्त किया गया था।
अमृतपाल एक गुरुद्वारे में छिपा हुआ था और पंजाब पुलिस ने कट्टरपंथी उपदेशक को चारों तरफ से घेर लिया। उसे कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया।
पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुखचैन सिंह गिल ने कहा, ‘‘अमृतसर पुलिस और पंजाब पुलिस की खुफिया इकाई ने एक संयुक्त अभियान चलाया। पंजाब पुलिस को अमृतपाल के रोडे गांव में होने का पता चला था। पुलिस ने गांव में उसे चारों तरफ से घेर लिया था।’’
बठिंडा वायु सेना स्टेशन से लगभग 2,000 किलोमीटर दूर असम के डिब्रूगढ़ के लिए विशेष उड़ान, दोपहर 2.20 बजे डिब्रूगढ़ में उतरी। सशस्त्र पुलिस कर्मियों के घेरे में उसे चिकित्सा जांच और अन्य औपचारिकताओं के लिए ले जाया गया और अंततः उसे केंद्रीय जेल भेज दिया गया। इसी जेल में पिछले कुछ हफ्तों में उसके नौ अन्य सहयोगियों को पंजाब से लाकर रखा गया है।
गिरफ्तारी के कुछ ही समय बाद एक वीडियो सामने आया, जिसमें कट्टरपंथी उपदेशक एक संक्षिप्त संबोधन देते हुए दिखाई दे रहा है, जिसमें वह संकेत दे रहा है कि वह आत्मसमर्पण कर रहा है।
एक अन्य क्लिप में वह भिंडरावाले की तस्वीर के सामने बैठा दिखाई दे रहा है। भिंडरावाले 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के अंदर छिपे आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए चलाए गए विवादास्पद सैन्य अभियान में मारा गया था।
गिल ने अमृतपाल के दावे का खंडन किया कि यह ‘‘आत्मसमर्पण’’ था, और कहा कि भगोड़े को घेर लिया गया था।
गिल ने बताया कि अमृतपाल को यह संदेश दिया गया था कि उसके भागने की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘अमृतपाल के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत वारंट जारी किए गए थे और सुबह इन्हें तामील किया गया। कानून अपना काम करेगा।’’
अमृतपाल की गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद एक वीडियो संदेश में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि राज्य में शांति और सद्भाव को बिगाड़ने वालों को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाएगा। मान ने कहा कि वह रात में लगातार घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थे।
अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार जसबीर सिंह रोडे ने दावा किया कि अमृतपाल ने आत्मसमर्पण किया है और उस वक्त वह भी मौजूद थे।
गुरुद्वारे के वीडियो में अमृतपाल यह भी कहता सुनाई दे रहा है, ‘‘यह जरनैल सिंह भिंडरावाले का जन्म स्थान है। यह वही स्थान है, जहां मेरा ‘दस्तार बंदी’ (पगड़ी बांधना) समारोह हुआ था। हम जीवन के अहम मोड़ पर खड़े हैं। पिछले एक महीने में जो भी हुआ है, वह सब आपने देखा है।’’
वीडियो में वह यह कहता दिख रहा है, ‘‘एक महीने पहले सिखों के खिलाफ सरकार ने ‘ज्यादती’ की। अगर केवल मेरी गिरफ्तारी का सवाल होता, तो शायद गिरफ्तारी के और भी कई तरीके होते जिन पर मैं सहयोग करता।’’
उसने कहा, ‘‘मैंने आत्मसमर्पण का फैसला किया और यह गिरफ्तारी कोई अंत नहीं है, यह एक शुरुआत है।’’ अमृतपाल ने कहा, ‘‘ दुनिया की अदालत में मैं दोषी हो सकता हूं लेकिन ईश्वर की अदालत में, मैं दोषी नहीं हूं ।’’
पंजाब पुलिस ने अजनाला थाने पर हमला करने के बाद 18 मार्च को अमृतपाल और उसके संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के सदस्यों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद से वह फरार था। पुलिस ने खालिस्तान समर्थक के खिलाफ सख्त रासुका लागू किया था।
ऐसी आशंकाएं थीं कि अमृतपाल के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ संबंध थे और वह अलग राष्ट्र ‘खालिस्तान’ की मांग के लिए सिख युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की दिशा में काम कर रहा था।
अमृतपाल पिछले साल दुबई से लौटा था और कार्यकर्ता-गायक दीप संधू की मौत के बाद वह ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रमुख बना था। संगठन के घोषित उद्देश्यों में युवाओं को मादक पदार्थों की लत से छुटकारा दिलाना शामिल है, लेकिन खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ एक दिखावा है।
अमृतपाल और उसके सहयोगियों के खिलाफ कथित रूप से वैमनस्य फैलाने, हत्या के प्रयास, पुलिस कर्मियों पर हमले और लोक सेवकों के कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालने के लिए कई मामले दर्ज किए गए हैं।
अमृतपाल 36 दिन तक फरार रहा। इस बीच, अधिकारियों ने उसके प्रमुख सहयोगियों को गिरफ्तार करके उस पर दबाव बनाना जारी रखा। अमृतपाल ने ब्रिटेन की निवासी किरणदीप कौर से इस साल फरवरी में शादी की थी। हाल में अमृतसर हवाई अड्डे से लंदन जाने वाली एक उड़ान में सवार होने से कौर को रोक दिया गया था।
अमृतपाल के कई समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया, लेकिन उनमें से ज्यादातर को रिहा कर दिया गया, क्योंकि अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने दावा किया कि युवाओं को परेशान किया जा रहा है।
खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी अमृतपाल सिंह को पंजाब से असम की एक जेल में लाए जाने की सूचना के मद्देनजर डिब्रूगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
एक अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय जेल में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘जेल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए असम पुलिस के विशिष्ट ब्लैक कैट कमांडो, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और अन्य सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘ अमृतपाल को कड़ी सुरक्षा के बीच विशेष कोठरी में रखा गया है। असम पुलिस के जवानों के साथ पंजाब पुलिस की एक टीम जेल में मौजूद है।’’
असम पुलिस ने अभी तक घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। डिब्रूगढ़ केंद्रीय जेल का निर्माण 1859-60 में अंग्रेजों ने 15.54 एकड़ जमीन पर किया था। अधिकारियों ने कहा कि यह सबसे पुरानी और बेहद मजबूत जेलों में से एक है। अमृतपाल के अलावा उसके नौ सहयोगी इस समय डिब्रूगढ़ केंद्रीय कारागार में बंद हैं।
‘वारिस पंजाब दे’ के चार सदस्यों को 19 मार्च को डिब्रूगढ़ लाए जाने के बाद से जेल परिसर और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई।
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