चंडीगढ़, 19 जून पंजाब मंत्रिमंडल ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से गुरबानी का ‘फ्री-टू-एयर’ प्रसारण सुनिश्चित करने के लिए ब्रिटिश काल के सिख गुरुद्वारा अधिनियम में संशोधन को सोमवार को मंजूरी दे दी।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब विधानसभा के दो दिवसीय सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा।
वर्तमान में, स्वर्ण मंदिर से गुरबानी का प्रसारण ‘पीटीसी’ द्वारा किया जाता है, जो एक निजी चैनल है जिसे अकसर शिरोमणि अकाली दल के बादल परिवार से जोड़ा जाता है।
सिखों के शीर्ष धार्मिक निकाय शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि 1925 का अधिनियम एक केंद्रीय कानून है और इसे केवल संसद द्वारा ही संशोधित किया जा सकता है।
आधिकारिक बयान में मुख्यमंत्री के हवाले से कहा गया कि राज्य सरकार इस अधिनियम में संशोधन करने के लिए पूरी तरह से सक्षम है क्योंकि उच्चतम न्यायालय पहले ही फैसला सुना चुका है कि यह अधिनियम कोई अंतर-राज्य अधिनियम नहीं, बल्कि एक राज्य संबंधी अधिनियम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने सिख गुरुद्वारा अधिनियम में धारा 125ए जोड़कर संशोधन करने का फैसला किया है, जिससे यह एसजीपीसी की जिम्मेदारी बन जाएगी कि वह श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) से पवित्र गुरबानी का ‘फ्री-टू-एयर’ सीधा प्रसारण सुनिश्चित करे।
मान ने कहा कि इस संशोधन को इस उद्देश्य से मंजूरी दी गई है कि पूरी मानवता मुफ्त में गुरबानी का सीधा प्रसारण सुन और देख सके।
इस बीच, एसजीपीसी प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी ने सोमवार को आप सरकार के कदम की कड़ी निंदा की। धामी ने अमृतसर में मीडिया से कहा कि अधिनियम में कोई भी संशोधन केवल एसजीपीसी के ‘जनरल हाउस’ (आम सभा) की सिफारिशों के तहत संसद के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा किया जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान दिल्ली में अपनी पार्टी के नेतृत्व को "खुश" करना चाहते हैं और दावा किया कि ‘‘सिखों के धार्मिक मामलों को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।’’
हालांकि, मान ने दावा किया कि यह निर्णय दुनिया भर में ‘सिख संगत’ की भावनाओं के अनुरूप है। मुख्यमंत्री ने इसे "सभी के कल्याण" के सार्वभौमिक संदेश को फैलाने के उद्देश्य से दुनिया भर में "सरब सांझी गुरबानी" का प्रसार करने के लिए समय की आवश्यकता बताया।
उन्होंने कहा कि यह कदम "संगत" को घर बैठे, यहां तक कि विदेशों में भी गुरबानी सुनने का अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मान ने कहा कि नये अधिनियम को सिख गुरुद्वारा (संशोधन) अधिनियम, 2023 कहा जाएगा और यह आधिकारिक राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से लागू होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिनियम के अनुसार यह बोर्ड (एसजीपीसी) का कर्तव्य होगा कि वह गुरुओं की शिक्षाओं को प्रचारित करने के लिए श्री हरमंदिर साहिब से गुरबानी को निर्बाध (बिना किसी विज्ञापन/विज्ञापन/विरूपण के) लाइव फीड (ऑडियो और वीडियो) बनाकर सभी मीडिया घरानों, प्रतिष्ठानों, मंचों, चैनलों आदि के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराये, जो भी इसे प्रसारित करना चाहते हैं।
मान ने कहा कि एक विनम्र और धार्मिक सिख के तौर पर वह दुनिया भर में गुरबानी के ‘फ्री-टू-एयर’ प्रसारण के समर्थक हैं।
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