देश की खबरें | दिव्यांगों को अनाज देने के लिए जनहित याचिका : दिल्ली उच्च् न्यायालय ने राज्यों को भेजा नोटिस
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 29 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने खाद्य सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन योजनाओं के तहत दिव्यांगों को अनाज उपलब्ध कराने का निर्देश केंद्र एवं राज्य सरकारों को देने लिए दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है ।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यामूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा । एक गैर सरकारी संगठन द्वारा यह याचिका दायर की गयी है ।

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इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को सूचीबद्ध कर दी।

केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की स्थायी वकील मोनिका अरोड़ा ने जनहित याचिका पर जवाब दाखिल करते हुए कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (एनएफएसए) कानून न तो गरीबी उन्मूलन और न ही विकास योजना है।

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उन्होंने कहा कि लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) जो गरीबी रेखा पर आधारित है के विपरीत एनएफएसए देश की कुल 67 प्रतिशत आबादी को एक समान कवर करता है।

केंद्र ने कहा कि एनएफएसए न केवल अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थियों को बल्कि गरीबी रेखा से नीचे रहने और कुछ हिस्से गरीबी रेखा से ऊपर रहने वालों को भी लभांवित करता है।

मंत्रालय ने अपने हलफनामें कहा, ‘‘ सभी लाभार्थियों को समान मूल्य पर राशन उपलब्ध कराई जाती है। एनएफएसए को इसलिए गरीबी अनुमान से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।’’

मंत्रालय ने कहा कि अंत्योदय अन्न योजना के दिशानिर्देशों में दिव्यांगता अर्हता पहले ही शामिल है और अधिकतर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने इसे एनएफएसए के लाभार्थियों की पहचान करने और शामिल किया है और ऐसे परिवारों को प्राथमिकता दी है।

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