नयी दिल्ली, आठ फरवरी विशेष प्रहरी बल के लिए अधिकारियों की नियुक्ति में विलंब को लेकर नौसेना की आलोचना करते हुए संसद की एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि भारतीय नौसेना के कई ‘फास्ट इंटरसेप्शन क्राफ्ट (तेज गति से कार्रवाई में सक्षम पोत’ (एफआईसी) खराब इंजनों की वजह से 2014 से 2019 तक परिचालन में नहीं रहे।
संसद में बुधवार को रखी गयी अपनी रिपोर्ट में, लोक लेखा समिति (पीएसी) ने नौसेना की आलोचना करते हुए यह भी कहा कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने 2009 में विशेष प्रहरी बल (एसपीबी) के लिए अधिकारियों की पूर्ण तैनाती की मंजूरी दी थी लेकिन 12 साल बाद भी यह कार्य नहीं हो पाया है।
एसपीबी एक समुद्री बल है जिसकी परिकल्पना 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद की गई थी। इस बल के गठन का प्राथमिक उद्देश्य एफआईसी के माध्यम से गश्त करके सभी तटीय और अपतटीय नौसैनिक संपत्तियों को सुरक्षा प्रदान करना था।
दस पाकिस्तानी आतंकवादियों के एक समूह ने 26 नवंबर, 2008 को, कराची से अरब सागर होते हुए समुद्री मार्ग से भारत की आर्थिक राजधानी में प्रवेश किया। इन आतंकवादियों ने मुंबई में एक रेलवे स्टेशन, दो लक्जरी होटलों और एक यहूदी केंद्र पर समन्वित हमले कर कहर ढाया था।
इस हमले के बाद, भारत ने समुद्री सुरक्षा को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने का निर्णय लिया।
सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने विशेष प्रहरी बल (एसपीबी) के गठन को फरवरी 2009 में मंजूरी दी थी। इसके तहत 13 भारतीय नौसैनिक बंदरगाहों पर, 120 अधिकारियों, 240 वरिष्ठ नाविकों और 640 कनिष्ठ नाविकों सहित 1000 कर्मियों की तैनाती की जानी थी।
फरवरी 2009 में 80 ‘फास्ट इंटरसेप्शन क्राफ्ट’ (एफआईसी) को विशेष प्रहरी बल का हिस्सा बनने की मंजूरी दी गई और सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बल के परिचालन के लिए तीन साल की समयसीमा तय की।
लोकलेखा समिति ने विशेष प्रहरी बल की स्थापना और परिचालन पर अपनी रिपोर्ट में ‘फास्ट इंटरसेप्शन क्राफ्ट’ की खरीद में देरी के साथ-साथ विशिष्ट स्टेशनों पर उनकी परिचालनगत उपलब्धता की आलोचना की।
समिति ने कहा कि ‘फास्ट इंटरसेप्शन क्राफ्ट’ के अधिग्रहण की मंजूरी अगस्त 2011 में दी गई थी और उनकी आपूर्ति में कुछ मुद्दों की वजह से विलंब हुआ।
इसमें कहा गया है कि एक ऑडिट में पाया गया कि ‘फास्ट इंटरसेप्शन क्राफ्ट’ की खरीद में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा दी गई मंजूरी से कई विचलन कर पता चला। इसमें जिसमें एक क्रमबद्ध आपूर्ति समयावधि और विभिन्न विशिष्टताओं के साथ स्वीकृत मात्रा से परे अतिरिक्त ‘फास्ट इंटरसेप्शन क्राफ्ट’ को शामिल करना शामिल है।
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति ने रिपोर्ट में कहा, ‘‘ऑडिट में पाया गया कि मंत्रिमंडलीय समिति की मंजूरी फरवरी 2009 को दी गई और इसके 12 साल बीत जाने के बावजूद विशेष प्रहरी बल के लिए अधिकारियों की पूरी तैनाती नहीं की गई थी।’’
लोकलेखा समिति के अनुसार उसने पाया कि ‘‘2014 से 2019 तक, कई ‘फास्ट इंटरसेप्शन क्राफ्ट’ विस्तारित अवधि के लिए दोषपूर्ण इंजनों के कारण परिचालन में नहीं रहे।’’
समिति ने कहा कि इस संबंध में नौसेना ने उसे सूचित किया कि अक्टूबर 2013 से अक्टूबर 2015 और उसके बाद जुलाई 2017 से फरवरी 2018 तक किसी भी मूल उपकरण निर्माता (ओईएम), व्यापक रखरखाव अनुबंध (सीएमसी) और वार्षिक रखरखाव अनुबंध (एएमसी) फर्मों से कोई समर्थन नहीं मिला।
इसमें कहा गया है कि इस अवधि के दौरान कोई रखरखाव नहीं किए जाने की वजह से ‘फास्ट इंटरसेप्शन क्राफ्ट’ के इंजन भी ख़राब हो गए।
इस संदर्भ में समिति ने सिफारिश की कि नौसेना समय पर मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करने और भविष्य में एएमसी की अनुपलब्धता की ऐसी घटनाओं से बचाव के वास्ते वार्षिक रखरखाव अनुबंधों को समय पर समाप्त करने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपना सकती है।
विशेष प्रहरी बल की तैनाती पर लोकलेखा समिति ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सुरक्षा परिदृश्य में व्यापक बदलाव आया है और भारतीय नौसेना को उभरते खतरों से निपटने के लिए अपने सुरक्षा उपायों को लगातार उन्नत करना चाहिए।
समिति ने सिफारिश की है कि विशेष प्रहरी बल के संचालन में प्राप्त अनुभवों और उभरते सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनजर, नौसेना को सागर प्रहरी बल के कामकाज की व्यापक समीक्षा करनी चाहिए, ताकि भविष्य की तैयारी सुनिश्चित की जा सके।
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