विदेश की खबरें | संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में कुछ मोर्चों पर प्रगति, जीवाश्म ईंधन पर अब भी नहीं बनी सहमति
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

अब तक चर्चाएं इस पर केंद्रित रही हैं कि राष्ट्र पूर्व-औद्योगिक समय की तुलना में तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में कहां हैं और कैसे इसमें प्रगति कर सकते हैं। वार्ताकारों ने मंगलवार को पाठ का एक नया मसौदा तैयार किया, लेकिन इसमें बहुत अधिक संकेत नहीं मिला कि अगले सप्ताह सत्र समाप्त होने पर किन पर सहमति बनेगी।

‘एसोसिएशन ऑफ स्मॉल आइलैंड स्टेट्स’ के अध्यक्ष सेड्रिक शूस्टर ने कहा कि पेरिस समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में असफल होने से ‘‘इस सीओपी को यह कहते हुए छोड़ना काफी मुश्किल हो जाएगा कि हम 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा हासिल कर सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि प्रमुख उत्सर्जकों और विकसित देशों को आगे आकर जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के प्रयासों को तेज करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम असफल हुए तो परिणाम विनाशकारी होंगे।’’

जर्मन जलवायु दूत जेनिफर मॉर्गन ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह इस बात पर स्पष्टता देखना चाहती हैं कि ऊर्जा परिवर्तन किस ओर जाना चाहिए तथा जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना चाहिए।

बुधवार के सत्र परिवहन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए थे। इस दौरान इलेक्ट्रिक वाहन की चार्जिंग के बुनियादी ढांचे के निर्माण और शहरी माल परिवहन को कार्बन मुक्त करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

जलवायु वार्ता ने पहले सप्ताह में थोड़ी कामयाबी हासिल की जब देशों ने जलवायु आपदाओं से प्रभावित देशों को मुआवजा देने के लिए ‘‘नुकसान और क्षति’’ कोष के गठन को अंतिम रूप दिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस के अनुसार, 50 तेल कंपनियों ने 2030 तक लगभग शून्य मीथेन उत्सर्जन तक पहुंचने का वादा किया है, जो ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लिए उद्योग की प्रतिबद्धता है, लेकिन यह ‘‘आवश्यकता से कम है।’’

‘क्लाइमेट एनालिटिक्स’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जलवायु वैज्ञानिक बिल हेयर ने कहा कि बैठक का मुख्य मुद्दा ‘‘जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना है। जब तक हम ऐसा नहीं करते, मुझे संदेह है कि क्या हम तापमान में सुधार देखेंगे।’’

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