देश की खबरें | तीसरे पक्ष से अनिवार्य रूप से ऑडिट कराई गई सूचना का सक्रियता से खुलासा किया जाए:केंद्र

नयी दिल्ली, 16 सितंबर केंद्र ने अपने सभी विभागों को तीसरे पक्ष द्वारा ‘ऑडिट’ की गई सार्वजनिक सूचना का अनिवार्य रूप से स्वत: ही खुलासा करने के लिए कहा है। कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में यह कहा गया है।

सभी सरकारी विभागों को आदेश दिया गया है कि वे अपने कामकाज, दायित्वों और अपने पास उपलब्ध रिकार्ड से जुड़ी ज्यादातर सूचना लोगों को मुहैया कराएं।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम,2005 की धारा 4 के सूचना तहत स्वत: सूचना साझा करने से जुड़े 2013 और 2019 के दिशानिर्देशों का उल्लेख करते हुए आदेश में कहा गया है कि हर मंत्रालय और सार्वजनिक प्राधिकरण को प्रत्येक वर्ष एक तीसरे पक्ष द्वारा अपने उन दस्तावेजों को सक्रियता से ‘ऑडिट’ कराना चाहिए, जिनका खुलासा किया जाना है।

आदेश में कहा गया है कि ‘ऑडिट’ में संबद्ध दिशानिर्देशों का अनुपालन किया जाना चाहिए। साथ ही, यह पड़ताल करना चाहिए कि क्या किसी अन्य प्रकार की सूचना का सक्रियता से खुलासा किया जा सकता है।

विभागों को इस तरह का ऑडिट सालाना कराना चाहिए और उसे अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर इस बारे में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को इससे अवगत कराना चाहिए।

आदेश में कहा गया है कि पारदर्शिता ऑडिट करने की जिम्मेदारी प्रत्येक मंत्रालय या विभाग या सार्वजनिक प्राधिकरण के तहत आने वाले संबद्ध प्रशिक्षण संस्थानों को दिया जा सकता है।

वर्ष 2020-21 के लिए सीआईसी की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पाया गया कि आयोग में पंजीकृत 2,275 सार्वजनिक प्राधिकरणों में सिर्फ 754 ने किसी सरकारी प्रशिक्षण संस्थान से अपनी सूचनाओं का ऑडिट कराने की जानकारी दी है, जिसे केंद्र गंभीरता से ले रहा है।

यह विषय विभाग से संबद्ध संसद की स्थायी समिति के संज्ञान में भी आया, जिसने सार्वजनिक प्राधिकरणों द्वारा स्वत: ही खुलासा की जाने वाली सूचना का तीसरे पक्ष द्वारा ऑडिट के खराब क्रियान्वयन को लेकर चिंता जताई थी।

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