इम्फाल, 28 फरवरी कांग्रेस ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की आलोचना करते हुए शुक्रवार को आरोप लगाया कि यह कदम मुख्य रूप से राज्य की ‘‘भाजपा सरकार की अक्षमता’’ के कारण उठाया गया है।
कांग्रेस की मणिपुर इकाई के उपाध्यक्ष हरेश्वर गोस्वामी ने संवाददाताओं से कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है, जबकि विधानसभा में भाजपा को पूर्ण बहुमत प्राप्त है।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि केंद्र में भाजपा सत्ता में है और राज्य सरकार भी इसी पार्टी द्वारा चलाई जा रही थी। यह मुख्य रूप से राज्य में भाजपा सरकार की अक्षमता के कारण है।’’
उन्होंने दावा किया कि दूसरा कारण ‘‘भाजपा विधायकों में मतभेद है’’। उन्होंने कहा, ‘‘अगर ये भाजपा विधायक अगले चुनाव में जीत भी गए तो सरकार नहीं बना पाएंगे। मैं संसद के अगले सत्र से पहले नयी सरकार के गठन की मांग करता हूं।’’
उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि राष्ट्रपति शासन से क्या परिणाम निकलेगा।
गोस्वामी ने आरोप लगाया, ‘‘बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान के पीछे कोई छिपा हुआ एजेंडा हो सकता है और इससे राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को खतरा है।’’
मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के अपने पद से इस्तीफा देने के कुछ दिन बाद पूर्वोत्तर राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा हो गई थी। इसके बाद केंद्र ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर विधानसभा को निलंबित किया जा चुका है। विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है।
गोस्वामी ने राज्य के लोगों द्वारा हथियार और गोला-बारूद सौंपने की सराहना की और हथियार सौंपने के लिए उचित मानदंडों और नीतियों का आह्वान किया।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘पहाड़ियों और घाटी क्षेत्रों में हथियारों को किस तरह से सौंपा जा रहा है, यह समझने के लिए एक प्रवक्ता की नियुक्ति किये जाने की जरूरत है।’’
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने लूटे गए और अवैध हथियारों को पुलिस को सौंपने की समयसीमा शुक्रवार को बढ़ाकर छह मार्च शाम चार बजे तक कर दी। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)










QuickLY