नयी दिल्ली, 29 जुलाई शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि सरकार ने इस साल जनवरी में कोचिंग संस्थानों के नियमन को लेकर दिशानिर्देश जारी किए थे, हालांकि उन्होंने दिल्ली में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले तीन विद्यार्थियों की मौत पर प्रत्यक्ष रूप से कोई टिप्पणी नहीं की।
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने पूरक प्रश्न पूछते हुए एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में पानी में डूब जाने से तीन विद्यार्थियों की मौत का जिक्र किया और कहा कि संस्थान जिस भवन से संचालित हो रहा था उसकी संबंधित प्राधिकार से अनुमति हासिल नहीं थी।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘बिना स्वीकृत भवन, बिना किसी सुविधा के कुछ कोचिंग सेंटर माफिया बन गए हैं... क्या सरकार कोई कार्रवाई करने जा रही है?’’
प्रधान ने अपने जवाब में कहा, ‘‘सदस्य ने एक सवाल उठाया है जिसका आज पूछे गए प्रश्न से सीधा संबंध नहीं है।’’
उनका कहना था, ‘‘लेकिन मैं आपके (आसन) माध्यम से सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह सरकार सभी छात्रों की संपूर्ण सामाजिक-मनोवैज्ञानिक और मानसिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे वे किसी कोचिंग सेंटर में पढ़ रहे हों, किसी संस्थान में पढ़ रहे हों, स्कूली शिक्षा या उच्च शिक्षा वाले संस्थान में हों।’’
उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों को लेकर विस्तृत विस्तृत दिशानिर्देश जनवरी, 2024 में सभी राज्यों को जारी किए गए थे।
प्रधान का कहना था कि राजस्थान, बिहार, गोवा जैसे कुछ राज्यों के उनके अपने नियम हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षा के संबंध में बात करें तो यह एक सामाजिक-मनोवैज्ञानिक मुद्दा है। हम सभी को इसका ध्यान रखना होगा। यह केवल आरोपों और जवाबों से निपटने वाला मुद्दा नहीं है।’’
उधर, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि सरकार ने छात्रों के बीच आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आत्महत्या के 1.2 प्रतिशत मामले ही परीक्षा में विफलता से संबंधित थे।
हक
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