नयी दिल्ली, 24 अगस्त नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय जल्द ही विभिन्न उद्योगों में हरित हाइड्रोजन के अनिवार्य इस्तेमाल पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी लेगा।
इसके तहत विभिन्न उद्योगों...खासकर पेट्रोलियम, इस्पात और उर्वरक में हरित हाइड्रोजन के एक निश्चित अनुपात में इस्तेमाल को अनिवार्य किया जाएगा।
अभी विभिन्न उद्योग गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित स्रोतों की बिजली के उपयोग के जरिये उत्पादित हाइड्रोजन का इस्तेमाल करते हैं।
केंद्रीय बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर. के. सिंह ने यहां बीएनईएफ शिखर सम्मेलन में कहा, ‘‘ अभी हरित हाइड्रोजन का अनिवार्य इस्तेमाल निर्धारण प्रक्रिया में है। हमने चर्चा की है और हम कुछ आंकड़े लेकर आए हैं। हम जल्द ही मंत्रिमंडल का रुख करेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हमने इसपर संबंधित मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श किया है।’’
सिंह ने कहा कि ज्यादातर मंत्रालय चाहते हैं कि शुरुआत में उपयोग की सीमाएं सीमित हो।
मंत्री ने बताया कि सरकार ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम में संशोधन किया है, जो सरकार को कच्चे माल (फीडस्टॉक) को जीवाश्म से गैर-जीवाश्म में बदलने के लिए आदेश देने का अधिकार देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ इसलिए मैं उर्वरक, पेट्रोलियम (उद्योगों) आदि को अनिवार्य कर सकता हूं। उदाहरण के लिए, मैं उर्वरक तथा पेट्रोलियम (इकाइयों) से पूछ सकता हूं कि आप ग्रे हाइड्रोजन का इस्तेमाल कर रहे हैं या अमोनिया प्राप्त कर रहे हैं और इसका कुछ प्रतिशत इस वर्ष से हरित होना चाहिए। धीरे-धीरे इसे बढ़ाया जा रहा है ताकि इसका 100 प्रतिशत हरित हाइड्रोजन हो।’’
वर्तमान में मंत्रालय उद्योगों के लिए हरित हाइड्रोजन के अनुपात के मुद्दे पर हितधारकों के साथ चर्चा कर रहा है।
इस वर्ष की शुरुआत में सरकार के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन अभियान की शुरुआत करने के मद्देनजर इसके मायने बढ़ गए हैं।
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