देश की खबरें | पूजा अनुदान का इस्तेमाल कोविड उपकरण की खरीद, जनता-पुलिस जुड़ाव पर होना चाहिए: अदालत
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

कोलकाता, 16 अक्टूबर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य में सामुदायिक दुर्गा पूजा आयोजकों को निर्देश दिया कि वे पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दिए गए 50,000 रुपये के अनुदान का 75 प्रतिशत कोविड-19 सुरक्षा उपकरणों की खरीद और बाकी सार्वजनिक-पुलिस जुड़ाव को मजबूती प्रदान करने पर खर्च करें।

न्यायमूर्ति एस. बनर्जी और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की एक खंडपीठ ने निर्देश दिया कि राज्य द्वारा दुर्गा पूजा समितियों को दिए गए धन का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता और खरीद बिल को लेखा परीक्षा के लिए अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गत 24 सितंबर को राज्य में 36,946 दुर्गा पूजा समितियों में से प्रत्येक को 50,000 रुपये के अनुदान की घोषणा की थी।

उन्होंने दुर्गा पूजा समन्वय समिति की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा था, ‘‘कोविड-19 महामारी के कारण, यह हम सभी के लिए कठिन समय है। हमने प्रत्येक दुर्गा पूजा समिति को 50,000 रुपये का अनुदान देने का फैसला किया है।’’

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सीआईटीयू नेता सौरव दत्त ने अनुदान तथा दमकल एवं बिजली वितरण कंपनियों से अनुमति के लिए आवेदन शुल्क में छूट जैसे अन्य अनुदान को चुनौती देते हुए गत नौ अक्टूबर को खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इस तरह का अनुदान भारत में धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा के खिलाफ है और यह संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों को चोट पहुंचाता है।

दलीलों के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि यह अनुदान ‘‘धर्मनिरपेक्ष उद्देश्यों’’ के लिए है, जैसे कोविड-19 सुरक्षा उपकरण खरीदने और सार्वजनिक-पुलिस जुड़ाव।

अदालत ने निर्देश दिया कि प्रत्येक समिति को प्रदान किये गए 50,000 रुपये के अनुदान का 25 प्रतिशत उपयोग जनता-पुलिस जुड़ाव को मजबूती प्रदान करने और सामुदायिक पुलिसिंग में और अधिक महिलाओं को शामिल करने के लिए किया जाए।

अदालत ने कहा कि बाकी 75 प्रतिशत राशि को सेनेटाइजर, मास्क और फेस शील्ड की खरीद पर खर्च किया जाए।

अदालत ने निर्देश दिया कि ऐसी खरीद के बिल संबंधित जिलों में अधिकारियों को ऑडिट के लिए प्रस्तुत किए जाएं और दुर्गा पूजा की छुट्टी के बाद राज्य सरकार द्वारा अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, जब मामले पर फिर सुनवाई की जाएगी।

अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम आदेश सभी दुर्गा पूजा समितियों को पत्रक के माध्यम से वितरित किया जाना चाहिए और अनुपालन पर एक हलफनामा राज्य के अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

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