मुंबई, आठ दिसंबर विश्लेषकों ने शुक्रवार को पर्याप्त प्रणालीगत नकदी बनाए रखने के रिजर्व बैंक के कदम को नीति तटस्थता की ओर बढ़ने का संकेत बताया।
इसके साथ ही उन्होंने निकट भविष्य में दर में कटौती की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से पहले ऐसा संभव नहीं।
इससे पहले केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने लगातार पांचवीं बार रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
आरबीआई ने मुद्रास्फीति से लड़ने के संकल्प को रेखांकित करते हुए कहा कि अब दरों में ढील की कोई गुंजाइश नहीं है।
एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने कहा, ''शुक्रवार को आई नीति में यथास्थिति उम्मीद के मुताबिक है, और पिछली नीतियों की तुलना में आरबीआई नकदी प्रबंधन पर कम आक्रामक दिखा है। इसे तटस्थता की ओर बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।''
बरुआ ने कहा कि नकदी का रुख भी मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान के अनुरूप लग रहा है।
इंडिया रेटिंग्स के प्रधान अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि आरबीआई वृद्धि को लेकर अधिक उत्साहित है और इस साल के लिए इसे आधा प्रतिशत बढ़ाकर सात फीसदी कर दिया गया है, लेकिन मुद्रास्फीति को लेकर केंद्रीय बैंक इतना आशावादी नहीं है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई को लगता है कि बार-बार आने वाले खाद्य कीमतों के झटकों और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण मुद्रास्फीति की गति में अभी भी काफी अनिश्चितता बनी हुई है।
क्रिसिल रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी के अनुसार रेपो दर को भले ही अपरिवर्तित छोड़ दिया गया है, लेकिन जोखिमों का प्रबंधन करने के लिए वास्तव में इसमें सख्ती हो सकती है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार जीडीपी पूर्वानुमान में सात प्रतिशत का संशोधन महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाजार से ग्रामीण मांग के मोर्चे पर विपरीत संकेत मिल रहे थे।
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