देश की खबरें | पुलिस कानून में संशोधन के आधार पर नहीं दर्ज होगी प्राथमिकी, केरल सरकार ने अदालत से कहा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

कोच्चि, 24 नवंबर केरल सरकार ने मंगलवार को उच्च न्यायालय को आश्वस्त किया कि पुलिस कानून में किए गए संशोधन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाले की पीठ के समक्ष सरकार ने यह आश्वासन दिया। राज्य में सत्तारूढ़ माकपा नीत एलडीएफ सरकार द्वारा पुलिस कानून में किए गए संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कई याचिकाओं पर पीठ सुनवाई कर रही थी।

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अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया, ‘‘केरल पुलिस कानून, 2011 में हाल में जोड़ी गयी धारा 118 ए के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।’’

जब अदालत ने कहा कि अध्यादेश तो जारी किया जा चुका है, इस पर सरकार ने आश्वस्त किया कि हालिया संशोधन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी।

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अदालत ने सरकार की ओर से दिए गए बयान को दर्ज किया। मामले पर अब बुधवार को अगली सुनवाई होगी।

संशोधन के जरिए सोशल मीडिया पर मानहानिकारक पोस्ट करने वालों के लिए पांच साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

भाजपा की केरल इकाई के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन और आरएसपी नेता शिबू बेबी जॉन ने उच्च न्यायालय में सोमवार को अलग-अलग याचिकाएं दायर कर संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी।

अपनी याचिका में सुरेंद्रन ने हाल में जोड़ी गयी धारा 118 ए को असंवैधानिक, अमान्य करार देने का अनुरोध किया है । आरएसपी के नेताओं ने भी याचिका दायर कर इस धारा को अमान्य करार देने का अनुरोध किया है।

सुरेंद्रन और शिबू बाबू जॉन के अलावा पुलिस कानून में विवादास्पद संशोधन को चुनौती देते हुए कई अन्य याचिकाएं दाखिल की गयी हैं।

कानून को लेकर देश भर में सियासी हंगामा मचने के बाद सरकार ने इस संशोधन पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार द्वारा किए गए संशोधन की आलोचना करते हुए कई नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति और मीडिया की स्वतंत्रता पर कुठाराघात बताया है।

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