नयी दिल्ली, 14 सितंबर भारत चाहता है कि विश्व बैंक देशों की लॉजिस्टिक्स रैंकिंग (एलपीआई) तय करते समय लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों जैसे पीएम गतिशक्ति पहल पर गौर करे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) में विशेष सचिव सुमिता डावरा ने कहा कि विश्व बैंक द्वारा रैंकिंग का वर्तमान तरीका ‘‘बहुत सीमित’’ है।
विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई-2023) में भारत 139 देशों में 38वें स्थान पर रहा है। पिछले साल की तुलना में उसकी रैंकिंग में छह स्थान का सुधार हुआ है। आखिरी बार रैंकिंग अप्रैल में जारी की गई थी।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘ हमें लगता है कि यह महत्वपूर्ण वैश्विक सूचकांकों पर भारत को रैंकिंग देने का तरीके का दायरा बेहद सीमित है। इस पर काफी काम चल रहा है और यह आकलन करते समय गणना में दिखना भी चाहिए।’’
राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति ने 2030 तक भारत की रैंकिंग को शीर्ष 25 में लाने का लक्ष्य रखा है।
डावरा ने कहा, ‘‘हमने मापदंडों और इसे करने के तरीके का विश्लेषण किया है। हम चाहेंगे कि विश्व बैंक हमारे उन सुधारों पर गौर करे जो भारत में लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं।’’
उन्होंने बताया कि डीपीआईआईटी फिर से विश्व बैंक के अधिकारियों से मुलाकात करेगा और उन्हें यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूलिप), लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक और पीएम गतिशक्ति पहल पर जानकारी देगा।
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