नयी दिल्ली, 13 जून उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर कोविड-19 महामारी से निपटने के लिये आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत व्यवस्था की गई ‘‘राष्ट्रीय योजना’’ तैयार करने, उसे अधिसूचित और लागू करने के लिये केंद्र सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) में प्राप्त चंदे की पूरी राशि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) को अंतरित करने के लिये केंद्र सरकार को निर्देश देने की भी याचिका में मांग की गई है।
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अधिवक्ता प्रशांत भूषण के जरिये यह याचिका (पीआईएल) सेंटर फॉर पब्लिक इंटेरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) ने दायर की है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 46 (1)(बी) के अनुरूप, मौजूदा एवं भविष्य में प्राप्त होने वाला सारा चंदा कोविड-19 से निपटने के लिये एनडीआरएफ में डाल देना चाहिए।’’
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इसमें कहा गया है, ‘‘महामारी से निपटने के लिये आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 10 और 11 के तहत एक राष्ट्रीय योजना अवश्य तैयार, अधूसचित और लागू किया जाना चाहिए। ’’
याचिका में इस बात का जिक्र किया गया है कि विश्व में कोविड-19 के मामलों के संदर्भ में भारत चौथे स्थान तक पहुंच गया है।
इसमें मांग की गई है कि अधिनियम की धारा 12 (राष्ट्रीय प्राधिकार, आपदा प्रभावित लोगों को न्यूतनम राहत के मानक के लिये दिशानिर्देशों की सिफारिश करेगा) के अनुरूप सरकार को कोविड-19 रोगियों को राहत मुहैया करने के लिये एक न्यूनतम मानक अवश्य निर्धारित करना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि देश में आये अभूतपूर्व संकट के मद्देनजर अचानक अस्थायी आदेश जारी करना स्वाभाविक है। लेकिन लॉकडाउन लागू होने के दो महीने बाद एक मजबूत राष्ट्रीय योजना की जरूरत है।
इसमें कहा गया है, ‘‘राज्यों के साथ परामर्श कर यह राष्ट्रीय योजना बनाये जाने की जरूरत है। जब देश क्रमिक रूप से लॉकडाउन हटा रहा है, ऐसे में यह केंद्र और राज्य के बीच विस्तृत समन्वय में अवश्य मदद करेगी। साथ ही, निरंतर कोविड-19 मामले बढ़ने के मुद्दे से निपटने में भी मदद मिलेगी।’’
याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड राष्ट्रीय योजना वर्ष 2019 का है और यह मौजूदा महामारी से उभरती स्थितियों से व्यापक रूप से यह नहीं निबटता है। साथ ही, इसमें लॉकडाउन, निषिद्ध क्षेत्र, सामाजिक दूरी आदि जैसे कदमों का भी जिक्र नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय योजना बनाने के लिये एक विशेषज्ञ समिति से भी सलाह लेनी चाहिए।
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