20 अप्रैल की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.एप्सटीन के सहयोगी पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर ब्रिटिश पीएम पर उठे सवाल

जहाज जब्ती से ईरान-अमेरिका वार्ता पर संकट, बातचीत रुकने की आशंका

भारत यात्रा पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति, आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर

उत्तर कोरिया ने क्लस्टर बमों से लैस मिसाइलों का परीक्षण किया

जयराम रमेश बोले, पीएम मोदी “पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रहे”

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम करवाने की दिशा में पाकिस्तान द्वारा निभाई जा रही भूमिका को लेकर कांग्रेस पार्टी के सांसद और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने टिप्पणी की है. उन्होंने इसे “पीएम मोदी की विदेश नीति के लिए एक बहुत बड़ा झटका” बताया है और देश की कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की मांग की है.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यह पूरी तरह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति के सार और शैली तथा नैरेटिव प्रबंधन, पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रहे हैं, जबकि उसे एक बिल्कुल नई छवि मिल गई है, जो नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा हासिल स्थिति से उलट है.”

जयराम रमेश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के करीबी संबंधों पर भी टिप्पणी की. उन्होंने लिखा, “यह भी स्पष्ट है कि फील्ड मार्शल और उसके साथियों ने ट्रंप के परिवार और करीबी साथियों के इकोसिस्टम को संभालने में भारत की तुलना में कहीं अधिक सफलता पाई है.”

कनाडा के पीएम बोले, “अमेरिका पर निर्भरता कमजोरी बनती जा रही है”

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने रविवार को जारी एक वीडियो संबोधन में कहा कि अमेरिका के साथ कनाडा के मजबूत आर्थिक रिश्ते, जो कभी उसकी ताकत थे, अब उसकी कमजोरी बन गए हैं और इसे सुधारने की जरूरत है. करीब 10 मिनट के इस संबोधन में कार्नी ने बताया कि उनकी सरकार कनाडा की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए निवेश आकर्षित करने और अन्य देशों के साथ व्यापार समझौते करने पर काम कर रही है.

उन्होंने कहा, “दुनिया अब ज्यादा खतरनाक और बंटी हुई है. अमेरिका ने व्यापार को लेकर अपना रुख पूरी तरह बदल लिया है और टैरिफ को इस हद तक बढ़ा दिया है कि ऐसा तो आखिरी बार ग्रेट डिप्रेशन के समय देखा गया था.” उन्होंने आगे कहा, “हमारी कई पुरानी ताकतें, जो अमेरिका के साथ करीबी रिश्तों पर आधारित थीं, लेकिन अब कमजोरियां बन गई हैं. ऐसी कमजोरियां जिन्हें हमें ठीक करना होगा.”

कार्नी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का असर ऑटो और स्टील उद्योग के कामगारों पर पड़ा है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनिश्चितता के माहौल के कारण कंपनियां निवेश करने से पीछे हट रही हैं. इसके अलावा, ट्रंप के उस बयान से भी कई कनाडाई नाराज हैं, जिसमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कही थी. कार्नी ने भरोसा दिलाया कि वह सरकार के प्रयासों की नियमित जानकारी लोगों को देते रहेंगे.

कार्नी खुद पहले बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर रह चुके हैं. उनका मानना है कि कनाडा अब अपनी आर्थिक और रणनीतिक दिशा बदलने पर जोर दे रहा है. उन्होंने कहा, “हमें अपना ख्याल खुद रखना होगा क्योंकि हम सिर्फ एक विदेशी साझेदार पर निर्भर नहीं रह सकते. हम अपने पड़ोसियों से आने वाले बदलावों को नियंत्रित नहीं कर सकते और न ही अपने भविष्य को इस उम्मीद पर छोड़ सकते हैं कि सब कुछ अचानक ठीक हो जाएगा.”

एप्सटीन के सहयोगी पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर ब्रिटिश पीएम पर उठे सवाल

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर सोमवार को संसद में सांसदों के सवालों का सामना करेंगे, क्योंकि लंबे समय से चल रहे पीटर मैंडेलसन से जुड़े विवाद ने उनकी सरकार को घेर रखा है. यह मामला जेफ्री एप्सटीन के पुराने सहयोगी मैंडेलसन की नियुक्ति और सुरक्षा जांच में खामियों को लेकर है. वैसे भी स्टार्मर पहले से ही जनता और अपनी लेबर पार्टी के कई सांसदों में लोकप्रिय नहीं हैं. ऐसी सूरत में वे इस विवाद को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह मामला उनके नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

पिछले गुरुवार को नए खुलासों के बाद उनके इस्तीफे की मांग और तेज हो गई, जिसमें कहा गया कि मैंडेलसन को 2024 के अंत में अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाया गया था, जबकि उन्होंने सुरक्षा जांच पूरी तरह पास नहीं की थी. स्टार्मर ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें और उनके मंत्रियों को इस विफल जांच की जानकारी नहीं दी गई थी, जिसे उन्होंने “माफ न करने योग्य” बताया. उन्होंने इसका दोष विदेश मंत्रालय के अधिकारियों पर डालते हुए वरिष्ठ सिविल सेवक ओली रॉबिन्स को बर्खास्त कर दिया. विपक्षी दलों ने स्टार्मर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने गलत जानकारी दी या जानबूझकर संसद को गुमराह किया.

स्टार्मर ने पहले संसद में कहा था कि मैंडेलसन की नियुक्ति पूरी प्रक्रिया के तहत हुई थी, लेकिन अब डाउनिंग स्ट्रीट का कहना है कि नियमों के अनुसार विदेश मंत्रालय के पास सुरक्षा जांच के बावजूद निर्णय बदलने का अधिकार था. सरकार ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री को इस खामी की जानकारी बाद में मिली. इसी बीच, ब्रिटिश पुलिस भी मैंडेलसन के खिलाफ 15 साल पुराने मंत्री कार्यकाल से जुड़े कथित कदाचार की जांच कर रही है. उन्हें फरवरी में गिरफ्तार कर रिहा किया गया था, हालांकि अब तक उन पर कोई आरोप तय नहीं हुआ है।

सरकार के कई मंत्री स्टार्मर के समर्थन में खड़े हैं और उनका कहना है कि अगर उन्हें पूरी जानकारी होती तो यह नियुक्ति कभी नहीं होती. लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह विवाद उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाता है. आने वाले स्थानीय चुनावों से पहले यह मामला और राजनीतिक दबाव बढ़ा सकता है, जिससे उनकी सरकार के भविष्य पर अनिश्चितता और गहरी हो गई है.

कैरेबियन सागर में ड्रग तस्करी के शक में अमेरिका ने नाव पर किया हमला, तीन की मौत

अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने कैरेबियन सागर में ड्रग्स ले जा रही एक संदिग्ध नाव पर हमला किया, जिसमें रविवार को तीन लोगों की मौत हो गई. यह खबर समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के हवाले से मिली है. यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के उस अभियान का हिस्सा है, जिसमें लैटिन अमेरिका के समुद्री इलाकों में कथित ड्रग तस्करी से जुड़े जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है. यह अभियान सितंबर की शुरुआत से जारी है और अब तक कम से कम 181 लोगों की मौत हो चुकी है. इसी तरह के हमले पूर्वी प्रशांत महासागर में भी किए गए हैं.

ईरान युद्ध के बावजूद, पिछले एक हफ्ते में इन हमलों में फिर तेजी आई है. हालांकि, अमेरिकी सेना ने अब तक यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिया है कि जिन जहाजों को निशाना बनाया गया, वे वास्तव में ड्रग्स ले जा भी रहे थे या नहीं.

कुछ समय पहले जनवरी में वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को भी पकड़ा गया था और अमेरिका ने उनपर भी ड्रग तस्करी के आरोप लगाए थे, जिनका सामना वो अभी भी न्यूयॉर्क में कर रहे हैं. उन्होंने अब तक खुद को दोषी नहीं माना.

ताजा हमले के बारे में अमेरिकी दक्षिणी कमांड ने पहले की तरह कहा कि उसने तस्करी के लिए पहचाने गए रास्तों पर कथित तस्करों को निशाना बनाया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो में एक नाव को पानी में चलते हुए दिखाया गया, जिसके बाद एक बड़ा विस्फोट होता है और नाव आग की लपटों में घिर जाती है.

राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पहले कह चुके हैं कि अमेरिका लैटिन अमेरिका के कार्टेल्स के साथ “सशस्त्र संघर्ष” के बीच में है और इन हमलों को उन्होंने अमेरिका में ड्रग्स के फ्लो और ओवरडोज से होने वाली मौतों को रोकने के लिए जरूरी बताया है. लेकिन आलोचकों ने इन हमलों की वैधता पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि इसके समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं दिए गए हैं.

जहाज जब्ती से ईरान-अमेरिका वार्ता पर संकट, बातचीत रुकने की आशंका

अमेरिकी नौसेना द्वारा एक ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज की जब्ती के बाद ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित बातचीत पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है. यह वार्ता सोमवार को पाकिस्तान में होनी थी, जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने की थी. लेकिन ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने अब तक इसमें शामिल होने की पुष्टि नहीं की है, जिससे बातचीत के शुरू होने पर ही सवाल उठ गए हैं.

ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी वार्ताकार पाकिस्तान में ईरान के साथ नए दौर की बातचीत करेंगे, लेकिन इसी बीच उन्होंने बताया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी जहाज को रोककर जब्त किया है. उनके अनुसार, “हमारे नेवी के जहाज ने उन्हें वहीं रोक दिया, इंजन रूम में छेद करके.” कहा जा रहा है कि जहाज ‘टॉस्का’ अमेरिकी मरीन के कब्जे में है. ईरान ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है.

उत्तर कोरिया ने क्लस्टर बमों से लैस मिसाइलों का परीक्षण किया

उत्तर कोरिया ने क्लस्टर बम वाले वॉरहैड से लैस बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है. उत्तर कोरिया की आधिकारिक न्यूज एजेंसी ‘केसीएनए’ ने इन परीक्षणों की जानकारी दी है. केसीएनए द्वारा जारी की गई तस्वीरों में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और उनकी बेटी, मिसाइल परीक्षणों को देखते हुए नजर आ रहे हैं.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यह इस महीने बैलिस्टिक मिसाइलों का चौथा, जबकि इस साल का सातवां परीक्षण था. उत्तर कोरिया ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमताओं का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है.

केसीएनए के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने रविवार को कम रेंज वाली पांच बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया. इसका उद्देश्य क्लस्टर बमों से लैस वॉरहैडों की ताकत और उनके प्रदर्शन का परीक्षण करना था. इन मिसाइलों को करीब 135 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य की ओर लॉन्च किया गया था. केसीएनए के मुताबिक, किम जोंग ने परीक्षण के नतीजों को लेकर संतुष्टि जताई है.

दक्षिण कोरिया ने इन मिसाइल परीक्षणों की निंदा की है और उत्तर कोरिया से "उकसावे" वाली कार्रवाईयों को रोकने के लिए कहा है. उत्तर कोरिया इसी महीने क्लस्टर बम वाले वॉरहैड से लैस एक अन्य बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण भी कर चुका है. इसके अलावा उसने एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हथियार का भी परीक्षण किया है.

भारत यात्रा पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति, आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जेइ म्यूंग तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं. यह बीते करीब आठ सालों में दक्षिण कोरिया के किसी राष्ट्रपति की पहली भारत यात्रा है. सोमवार, 20 अप्रैल को राष्ट्रपति भवन परिसर में उनका राजकीय स्वागत किया गया. इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे. सोमवार को राष्ट्रपति म्यूंग और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बातचीत भी होगी. इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिए जाने की उम्मीद है.

राष्ट्रपति म्यूंग ने रविवार रात को नई दिल्ली में दक्षिण कोरियाई समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कहा, "दक्षिण कोरिया और भारत के बीच आर्थिक सहयोग का स्तर अभी भी बहुत कम है…भविष्य में हम इसका विस्तार करेंगे और दक्षिण कोरिया एवं भारत के संबंधों को अब से बिल्कुल अलग बना देंगे." उन्होंने आगे कहा कि आपूर्ति श्रंखलाओं में अस्थिरता और ईरान युद्ध से जुड़ा वैश्विक आर्थिक तनाव, दोनों देशों को एक दूसरे के लिए "सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार" बना देता है.

राष्ट्रपति म्यूंग के सलाहकार वी सुंग-लक का कहना है कि दोनों देश अपने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते में भी सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि पिछले वित्त वर्ष में हुए 25.7 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 2030 तक 50 अरब डॉलर तक ले जाया जा सके. दोनों देश समुद्री जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में अपनी साझेदारी बढ़ाना चाहते हैं. इसके अलावा वित्त, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की भी योजना है.

अमेरिका ने जब्त किया ईरानी जहाज, ईरान बोला, करारा जवाब देंगे

ईरान के अधिकारियों ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने दोनों देशों के बीच हुए संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन किया है. ईरान का कहना है कि अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी में उसके एक कमर्शियल जहाज पर गोलीबारी की. इस घटना के बाद ईरान के शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान, हजरत खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देने की बात कही है.

ईरान की सैन्य कमान के प्रवक्ता ने कहा, “हम चेतावनी देते हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सशस्त्र सेनाएं जल्द ही अमेरिका की सेना द्वारा की गई इस सशस्त्र समुद्री लूट का जवाब देंगी और उसका बदला लेंगी.”

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा था कि अमेरिकी बलों ने एक ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज को अपने कब्जे में ले लिया. उन्होंने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा कि यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था.

ट्रंप ने कहा, “हमारे नेवी के जहाज ने इंजन रूम में छेद करके उन्हें वहीं रोक दिया.” उन्होंने आगे बताया कि अमेरिकी मरीन ने ‘टॉस्का’ नाम के इस जहाज को अपने कब्जे में ले लिया है और वे “देख रहे हैं कि इसमें क्या मौजूद है.”

अमेरिका का दावा है कि यह जहाज ईरानी बंदरगाहों और शिपिंग पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था. वहीं, ईरान की सरकारी मीडिया ने एक सैन्य प्रवक्ता के हवाले से कहा कि यह जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था.