बेंगलुरु, 28 अगस्त कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मैसूरु में धरोहर ढांचों - देवराज मार्केट और लैंसडाउन बिल्डिंग - को ध्वस्त किए जाने को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका खारिज कर दी है।
मैसूरु के उपायुक्त द्वारा गठित एक कार्यबल समिति और विशेष धरोहर समिति ने इमारतों को ध्वस्त करने की सिफारिश की थी क्योंकि वे जीर्ण-शीर्ण स्थिति में हैं।
मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति एम जी एस कमल की खंडपीठ ने हाल के एक फैसले में कहा, ‘‘यह स्थापित कानून है कि जब विशेषज्ञों के विचार/राय पर गौर करने का मुद्दा आता है, तो अदालतों को रिआयत दिखाने में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि अदालतों के पास विशेषज्ञता नहीं है।’’
प्रोफेसर डी श्रीजय देवराज उर्स, जी सत्यनारायण (गौरी सत्या), एन निरंजन निकम और आर राजा चंद्रा सहित मैसूर के नागरिकों द्वारा दायर जनहित याचिका खारिज कर दी गई।
अदालत ने कहा, ‘‘इन समितियों का गठन क्षेत्र में विशेषज्ञों की राय लेने के लिए किया गया था, जिन्होंने देवराज मार्केट का मौके पर निरीक्षण किया और आवश्यक सामग्री एकत्र की और उसके बाद राय दी कि इमारत का पुनर्निर्माण करना उचित नहीं होगा और एकमात्र रास्ता इमारत को ध्वस्त करना है।’’
उच्च न्यायालय ने कहा कि वह विशेषज्ञों की राय पर फैसला नहीं दे सकता।
अदालत ने कहा, ‘‘तथ्य यह है कि देवराज मार्केट की इमारत का एक हिस्सा पुनर्स्थापना मरम्मत के दौरान ढह गया और बाजार के लिए संभावित खतरा है, हमारी राय है कि यह अदालत विशेषज्ञों की सलाह को खारिज नहीं कर सकती।
दोनों इमारतें 130 साल पुरानी हैं और महाराजा चामराजेंद्र वोडयार के शासनकाल के दौरान बनी थीं। जनहित याचिका में दावा किया गया कि इन इमारतों को मैसूर महल और किले के पूरक के रूप में बनाया गया था और इन्हें धरोहर इमारतों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
प्राधिकारियों ने दलील दी थी कि इमारतों की खराब हालत के कारण उनका मरम्मत का काम जारी नहीं रखा जा सकता। जब मरम्मत का काम चल रहा था तो इमारत का एक हिस्सा ढह भी गया था। इसके बाद, विशेषज्ञ समितियों ने इमारतों को ध्वस्त करने की सिफारिश की।
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