जरुरी जानकारी | पीजीसीआईएल ने नहीं वसूला 6,853 करोड़ रुपये का ट्रांसमिशन नेटवर्क छोड़ने का शुल्क: कैग

नयी दिल्ली, 18 सितंबर सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ने लंबी अवधि के ट्रांसमिशन नेटवर्क पहुंच को छोड़ने के मामले में ग्राहकों से 6,853.43 करोड़ रुपये की वसूली नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप बिजली दरें महंगी हुईं। कैग की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आयी।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) की पारेषण परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन पर ऑडिट रिपोर्ट शुक्रवार को संसद में पेश की। इसमें 12वीं योजना (2012-2017) के दौरान पीजीसीआईएल द्वारा निष्पादित पारेषण परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिये प्रदर्शन लेखापरीक्षा की गयी।

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इसमें कहा गया है कि सीईआरसी (केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग) विनियमों के अनुसार, कोई भी दीर्घकालिक ग्राहक बीच में खरीद बंद करने पर रूक जाने वाली विद्युत पारेषण क्षमता के लिये क्षतिपूर्ति का भुगतान कर अपने दीर्घकालिक पहुंच (एलटीए) अधिकारों को तय अवधि के पूरा होने से पहले आंशिक रूप से या फिर पूरी तरह से छोड सकता है।

कैग ने पाया कि सितंबर 2010 से मार्च 2018 तक कुल 26,836 मेगावाट एलटीए को ग्राहकों ने छोड़ा लेकिन ऐसे ग्राहकों से क्षमता त्यागने को लेकर कोई शुल्क नहीं लिया गया।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके परिणामस्वरूप 6,853.43 करोड़ रुपये की राशि अभी तक नहीं मिली है। पीजीसीआईएल द्वारा अचानक छोड़ी गई क्षमता के लिये क्षतिपूर्ति शुल्क नहीं लिये जाने की वजह से ही बिजली उपभोक्ताओं को अतिरिक्त वित्तीय बोझ वहन करना पड़ता है।

कैग ने यह भी पाया कि निर्धारित सीईआरसी समयसीमा के भीतर परियोजनाओं के पूरा नहीं होने के कारण, पीजीसीआईएल ने टैरिफ के हिस्से के रूप में इक्विटी पर अतिरिक्त रिटर्न के मामले में 112.51 करोड़ रुपये कमाने का अवसर भी खो दिया।

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