देश की खबरें | विस्फोट के दोषी की अलग कोठरी में रखे जाने के खिलाफ याचिका खारिज

मुंबई, 18 फरवरी बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2010 में पुणे जर्मन बेकरी विस्फोट मामले में दोषी हिमायत बेग को किसी "मनोवैज्ञानिक आघात" का खतरा नहीं है। बेग ने शिकायत की थी कि उसे महाराष्ट्र की नासिक केंद्रीय जेल में पिछले 12 वर्षों से एकांत कारावास में रखा गया है।

बेग ने पिछले साल दायर याचिका में दावा किया था कि एकांत कारावास के कारण उसकी मानसिक सेहत प्रभावित हो रही है और बेग ने उसे एकांत कारावास से बाहर स्थानांतरित किए जाने की अपील की थी।

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और नीला गोखले की खंडपीठ ने कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा, "वर्तमान स्थिति में याचिकाकर्ता (बेग) द्वारा किए गए दावे के अनुसार किसी मनोवैज्ञानिक आघात की स्थिति नहीं है।"

जेल प्रशासन द्वारा बेग को कोई कार्य सौंपने के अनुरोध पर अदालत ने कहा कि बेग को जेल नियमों और विनियमों के अनुसार कार्य सौंपा जाएगा।

महाराष्ट्र सरकार ने इससे पहले उच्च अदालत को बताया था कि राज्य की किसी भी जेल में एकांत कारावास की व्यवस्था नहीं है।

जेल अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट जैसे जघन्य अपराधों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को अन्य कैदियों से अलग रखा जाता है।

पुणे की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2013 में बेग को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) के तहत दोषी करार देते हुए उसे मौत की सजा सुनाई थी।

उच्च अदालत ने वर्ष 2016 में उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया और यूएपीए के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया।

बेग जर्मन बेकरी विस्फोट मामले में दोषी ठहराया गया एकमात्र व्यक्ति था। फरवरी 2010 में पुणे स्थित इस लोकप्रिय रेस्टोरेंट में हुए विस्फोट में 17 लोगों की मौत हो गई थी और 60 अन्य घायल हुए थे।

इस मामले में छह अन्य लोगों के खिलाफ भी आरोपपत्र दायर किया गया है।

राखी नरेश

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