नयी दिल्ली, आठ अगस्त मुसलमानों की हत्या और उनका सामाजिक व आर्थिक बहिष्कार करने का हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों में रैलियों में आह्वान करते हुए कथित तौर पर ‘खुलेआम दिये जाने वाले नफरती भाषणों’ को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है।
हरियाणा में हुई हालिया साम्प्रदायिक झड़पों में छह लोगों की मौत हुई है।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ के समक्ष मंगलवार को याचिका का उल्लेख किया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रधान न्यायाधीश के समक्ष याचिका का उल्लेख किया, जो पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को केंद्र द्वारा निरस्त किये जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दलीलें सुन रही पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का नेतृत्व कर रहे हैं।
संविधान पीठ के न्यायाधीश भोजनावकाश के लिए उठने ही वाले थे कि अनुच्छेद 370 के विषय पर दलील पेश कर रहे सिब्बल ने कहा कि गुरुग्राम में एक बड़ी घटना हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘गुरुग्राम में एक बड़ी घटना हुई है, जहां यह आह्वान किया गया...कि यदि आप इन लोगों (मुसलमानों) को दुकानों में काम पर रखेंगे, तो आप गद्दार कहे जाएंगे।’’ सिब्बल ने कहा कि इस बारे में शीर्ष न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है।
पत्रकार शाहीन अब्दुल्ला द्वारा दायर की गई याचिका में शीर्ष न्यायालय के दो अगस्त के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है, ‘‘हमें उम्मीद और विश्वास है कि राज्य सरकारें एवं पुलिस यह सुनिश्चित करेंगी कि किसी भी समुदाय के खिलाफ कोई नफरती भाषण नहीं दिया जाए और संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाए।’’
याचिका में कहा गया है कि शीर्ष न्यायालय के आदेश के बावजूद विभिन्न राज्यों में 27 रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें नफरती भाषण दिये गए।
इसमें कहा गया है, ‘‘उक्त आदेश के बावजूद विभिन्न राज्यों में 27 रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें मुसलमानों की हत्या करने और उनका सामाजिक व आर्थिक बहिष्कार करने के लिए खुलेआम नफरती भाषण दिये गए हैं।’’
याचिका में एक सारिणी के जरिये एक अगस्त से लेकर सात अगस्त 2023 के बीच हुई कुछ रैली का उल्लेख किया गया है। साथ ही, संबद्ध वीडियो लिंक भी उपलब्ध कराया गया है।
इसमें कहा गया है, ‘‘दो अगस्त 2023 को सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में, हरियाणा के हिसार में ‘समस्त हिंदू समाज’ ने एक शोभायात्रा निकाली, जिसमें शामिल लोगों को पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में यह चेतावनी देते सुना जा सकता है कि यदि उन्होंने (दुकानदारों ने) दो दिन बाद भी किसी मुस्लिम को काम पर रखा तो उनकी दुकानों का बहिष्कार किया जाएगा।’’
याचिका में दावा किया गया है कि चार अगस्त को मध्य प्रदेश में सागर जिला पुलिस की मौजूदगी में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक नेता ने हिंसा और मुसलमानों का बहिष्कार करने का खुलेआम आह्वान किया।
इसमें कहा गया है, ‘‘....इस तरह की रैली देश में साम्प्रदायिक वैमनस्य पैदा करेगी और व्यापक स्तर पर हिंसा की ओर ले जाएगी।’’
इसमें दिल्ली के पुलिस आयुक्त के साथ-साथ उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पुलिस महानिदेशकों तथा अन्य अधिकारियों को पर्याप्त कदम उठाने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि इस तरह की रैली की अनुमति नहीं दी जाए।
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