देश की खबरें | बिहार न्यायिक सेवा की परीक्षा स्थगित करने के लिये न्यायालय में याचिका
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 28 सितंबर कोविड-19 महामारी के मद्देनजर बिहार न्यायिक सेवा की प्रतियोगी परीक्षा स्थगित करने के लिये अभ्यर्थियों के एक समूह ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है।

यह याचिका 13 अभ्यर्थियों ने दायर की है। इसमें 221 सिविल न्यायाधीश (जूनियर ग्रेड)/ न्यायिक मजिस्ट्रेट के पदों के वास्ते प्रतियोगी परीक्षा के लिये बिहार लोक सेवा आयोग की अधिसूचना और इसके लिये पंजीकरण तथा ऑनलाइन आवेदन के लिये निर्धारित समय सीमा को चुनौती दी गयी है। याचिका में आयोग की इस अधिसूचना को ‘अनुचित, मनमाना और अव्यावहारिक’ बताया है।

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आयोग की अधिसूचना के अनुसार ये परीक्षायें सात अक्टूबर, 2020 को होनी हैं।

याचिका के अनुसार, ‘‘याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह अधिसूचना मौलिक अधिकारों और इस परीक्षा से जुडी वाजिब अपेक्षाओं को अनदेखी करके जारी की गयी है।’’

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याचिका के अनुसार, ‘‘यह अधिसूचना याचिकाकर्ताओं और ऐसे ही हजारों अभ्यर्थियों के प्रत्यक्ष रूप से संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 19 में प्रदत्त सार्वजनिक सेवा के लिये समान अवसर प्रदान करने के मौलिक अधिकार का हनन करती है। ’’

याचिका में इस अधिसूचना को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि यह अधिसूचना अतार्किक, मनमानी और स्पष्ट रूप से सही तरीके से विचार नहीं करने का नतीजा है।

अधिवक्ता अरविन्द गुप्ता के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि यह आपदा प्रबंधन कानून और संक्रामक बीमारी कानून के अनुरूप नहीं होने की वजह से इससे जन-स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार मौजूदा हालात में उनके और उन जैसे हजारों अभ्यर्थियों के लिये इस प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होना लगभग असंभव होगा।

याचिका में कहा गया है कि स्कूल और कॉलेज इस महामारी के संक्रमण को फैलाने वाले हो सकते हैं क्योंकि अनेक स्थानों पर बने परीक्षा केन्द्रों पर हजारों अभ्यर्थी एकत्र होंगे। ऐसी स्थिति में कोविड-19 महामारी की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर इस परीक्षा के प्रश्न पत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं का सैनिटाइजेशन सुनिश्चित करना मुश्किल होगा।

अनूप

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