नयी दिल्ली, 23 मई द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के दिग्गज नेता एम. करुणानिधि की याद में मरीना बीच पर कलम की आकृति का एक स्मारक (पेन मॉन्यूमेंट) बनाने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है।
राज्य सरकार ने मुथमिल कलाइगनर करुणानिधि स्मारक के पास मरीना बीच पर 134 फुट ऊंची 'पेन' प्रतिमा बनाने की योजना बनाई है।
करुणानिधि राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कुशल लेखक भी थे। उन्होंने द्रमुक के अखबार 'मुरासोली' के लिए लगभग रोजाना लेखन किया।
मदुरै निवासी के. के. रमेश की ओर से दायर याचिका में यह कहते हुए शीर्ष अदालत से तमिलनाडु सरकार और पर्यावरण मंत्रालय को निर्णय वापस लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि यह पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार के सभी विभागों ने पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए जल्दबाजी में प्रस्तावित स्मारक के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया।
याचिका के अनुसार, ‘‘इन क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों का प्राकृतिक जल प्रवाह पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा, जिसके परिणामस्वरूप अंततः गंभीर प्राकृतिक आपदाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
अधिवक्ता नरेंद्र कुमार वर्मा के जरिये दायर याचिका में कहा गया है, ‘‘विशेषज्ञों की राय बताती है कि तमिलनाडु में हाल के वर्षों में आई विनाशकारी बाढ़ समुद्र के किनारे अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों और अप्रवाही जल के प्राकृतिक रास्ते में विवेकहीन अतिक्रमण का तत्काल परिणाम है।’’
याचिका में कहा गया है कि 80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह स्मारक समुद्र तट को और प्रभावित कर सकता है और मछली की आबादी पर प्रभाव डाल सकता है।
याचिकाकर्ता ने सभी राज्यों के तटीय क्षेत्रों को समुद्र के बढ़ते स्तर से बचाने और वहां किसी भी निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश का अनुरोध भी किया है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY