देश की खबरें | लक्षद्वीप के सांसद की सदस्यता बहाल होने के खिलाफ न्यायालय में याचिका

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल की लोकसभा की सदस्यता बहाल करने की लोकसभा सचिवालय की अधिसूचना को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर चुनौती दी गई है।

केरल उच्च न्यायालय द्वारा एक आपराधिक मामले में फैजल की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाए जाने के बाद फैजल की सदस्यता बहाल की गई थी।

शीर्ष अदालत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता की सदस्यता बहाल करने की लोकसभा सचिवालय की अधिसूचना जारी होने के बाद संसद सदस्य के तौर पर उनकी अयोग्यता के खिलाफ दायर याचिका का 29 मार्च को निस्तारण कर दिया था।

अधिवक्ता अशोक पांडे द्वारा दायर याचिका में पूछा गया है कि क्या एक अभियुक्त की दोषसिद्धि पर अपीलीय अदालत द्वारा रोक लगाई जा सकती है और क्या उसके आधार पर लोकसभा सदस्य की अयोग्यता को रद्द किया जा सकता है।

पांडे ने 29 मार्च की अधिसूचना को रद्द करने की मांग करते हुए अपनी याचिका के माध्यम से तर्क दिया कि यदि संसद या राज्य विधानमंडल के किसी सदस्य ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा आठ (3) के साथ अनुच्छेदों 102 और 191 में कानून के संचालन के तहत अपना पद गंवा दिया हो तो वह किसी उच्च अदालत द्वारा आरोपों से बरी किए जाने तक अयोग्य रहेगा।

याचिका में कहा गया है, “मोहम्मद फैजल की दोषसिद्धि पर रोक लगाने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश के मद्देनजर, याचिकाकर्ता इस अदालत से इस मुद्दे पर भी फैसला करने की प्रार्थना करता है कि क्या किसी अभियुक्त की दोषसिद्धि पर अपीलीय अदालत द्वारा रोक लगाई जा सकती है या नहीं और क्या दोषसिद्धि पर रोक के आधार पर, एक व्यक्ति जिसे अयोग्यता का सामना करना पड़ा है, वह संसद/राज्य विधानमंडल के सदस्य के रूप में या सदस्य होने के लिए योग्य हो जाएगा।”

उन्होंने कहा कि फैजल को एक आपराधिक मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत दोषी ठहराये जाने और 10 साल के कारावास की सजा सुनाये जाने के बाद संसद की सदस्यता से अयोग्य हो गये थे और ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष का उनकी सदस्यता बहाल करने का निर्णय सही नहीं है।

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