देश की खबरें | कई निजी अस्पतालों की फॉरेंसिक ऑडिट का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय में अर्जी दायर
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नयी दिल्ली, आठ जून दिल्ली उच्च न्यायालय में एक अर्जी दायर कर सरकार से रियायती दर पर प्राप्त जमीन पर परमार्थ न्यासों द्वारा संचालित निजी अस्पतालों की फॉरेंसिक ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है। इन अस्पतालों पर आरोप लगाया गया है कि ये पर कोविड-19 के मरीजों से भारी-भरकम शुल्क वसूल रहे हैं।

यह मामला न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ के सामने सोमवार को सूचीबद्ध था। पीठ ने 24 जून के लिए इस पर सुनवाई स्थगित कर दी। एक वकील ने यह अर्जी दायर की है।

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दिल्ली सरकार के वकील रमेश सिंह और केंद्र सरकार के वकील अनुराग अहलूवालिया ने कहा कि पीठ ने इसकी सुनवाई 24 जून तक के लिए स्थगित कर दी ताकि याचिकाकर्ता अपनी अर्जी में कुछ संशोधन कर पाये।

अदालत के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है।

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सिंह ने कहा कि उन्होंने पीठ के सामने दिल्ली सरकार के चार जून के दो आदेश भी पेश किये जिनमें से एक में रियायती दर पर जमीन पाने वाले 50 से ज्यादा निजी अस्पतालों को ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत 10-10 फीसदी बेड कोविड और गैर कोविड मरीजों के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया गया था।

दूसरे आदेश में कोरोना वायरस का उपचार करने के लिए पंजीकृत सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को कोविड-19 के मरीजों के उपचार से संबंधित शुल्कों की अपनी सूची के बारे में स्वास्थ्य विभाग को सूचित करने को कहा गया था।

याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय राजधानी के 11 निजी अस्पतालों के ऑडिट की दरख्वास्त की है, जिन्हें उनके अनुसार रियायती दर पर हासिल जमीन पर परमार्थ न्यास चलाते हैं।

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