मुंबई, एक फरवरी बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने के महाराष्ट्र सरकार के कदम को चुनौती देने वाला याचिकाकर्ता अपनी याचिका पर सुनवाई के लिए कुछ दिनों तक इंतजार कर सकता है ।
अदालत ने इस बात पर विचार किया कि जाति प्रमाण पत्र नवंबर 2023 से दिए जा रहे हैं।
अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की जब 'ओबीसी वेलफेयर फाउंडेशन' के अध्यक्ष होने का दावा करने वाले मंगेश सासाने ने इस सप्ताह की शुरुआत में दायर अपनी जनहित याचिका (पीआईएल) पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने कहा कि जब नयी याचिका दायर की जाती है और उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में उसे नंबर दिया जाता है तो नयी ‘स्वत: सूचीबद्ध प्रणाली’ के अनुसार, उसे आमतौर पर चार दिन के भीतर सुनवाई के लिए पेश किया जाता है।
उच्च न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, याचिका पर छह फरवरी को सुनवाई होगी। इस याचिका में दावा किया गया है कि मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देकर राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण को कम कर रही है।
सासाने के वकील आशीष मिश्रा ने बृहस्पतिवार को पीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख किया और तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।
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