नयी दिल्ली, 21 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने पशु अधिकार समूह पेटा की देशभर के लगने वाले सर्कस में पशुओं की प्रस्तुतियां को तत्काल रोकने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) से सोमवार को जवाब मांगा।
मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल तथा न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने अंतराष्ट्रीय पशु अधिकार समूह पीपल्स फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) की भारतीय इकाई की याचिका पर पर्यावरण मंत्रालय, पशुपालन मंत्रालय, एडब्ल्यूबीआई, सीजेडए तथा 27 विभिन्न सर्कस से जवाब मांगा है।
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हालांकि उच्च न्यायालय ने पशुओं को तुरंत कब्जे में लेने अथवा पेटा, भारत को पशुओं को भोजन एवं दवाइयां उपलब्ध करवाने की अनुमति देने संबंधी कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया।
पीठ ने कहा कि पशुओं को दवा तथा भोजन उपलब्ध करवाने से पेटा को किसी ने नहीं रोका लेकिन अदालत शुरुआती चरण में ही दूसरे पक्ष की बात सुने बगैर अपने आदेश में इस बात को शामिल नहीं कर सकती है।
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इस टिप्पणी के साथ पीठ ने मामले को 17 अगस्त के लिए स्थगित कर दिया।
पेटा, भारत ने याचिका में दावा किया है कि कोविड-19 के प्रकोप और उसके कारण लगे लॉकडाउन के कारण सर्कस भोजन नहीं दे पा रहे जिसके कारण पशु भूखमरी की कगार पर हैं।
याचिका में सर्कस में पशुओं के खेलों को रोकने की भी मांग की गई है।
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